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उत्तराखंड में ‘मनचाही पोस्टिंग’ का प्लान तैयार, वन टाइम सेटलमेंट से मिल सकती है पसंदीदा तैनाती

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देहरादून। उत्तराखंड में अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी पसंद के अनुसार तैनाती देने के लिए ग्राम्य विकास विभाग नई व्यवस्था तैयार कर रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत ‘वन टाइम सेटलमेंट’ के जरिए कर्मचारियों को एक बार अपनी पसंद के स्थान पर पोस्टिंग का अवसर मिल सकता है।

वर्षों से लंबित पोस्टिंग और तबादले से जुड़ी समस्याओं को हल करने के उद्देश्य से विभाग इस मॉडल पर काम कर रहा है। बताया जा रहा है कि प्रस्ताव का मसौदा लगभग तैयार है और इसे जल्द ही कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है।

क्या है योजना का उद्देश्य
सरकार का मानना है कि बार-बार तबादले और पोस्टिंग की कोशिशों से कर्मचारियों का समय और ऊर्जा प्रभावित होती है। यदि एक बार स्थायी समाधान दे दिया जाए, तो कर्मचारी अपने कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे और कार्यक्षमता में सुधार आएगा।

कैडर बदलने का मिलेगा मौका
प्रस्ताव के अनुसार, कर्मचारियों और अधिकारियों को सेवा अवधि में एक बार कैडर परिवर्तन का विकल्प दिया जा सकता है। इससे कुमाऊं से गढ़वाल या किसी अन्य जिले में स्थानांतरण संभव हो सकेगा। जिला कैडर के कर्मचारियों को भी अपनी पसंद के जिले में तैनाती का अवसर मिल सकता है।

किसे मिलेगा लाभ
यह योजना विशेष रूप से ग्राम विकास विभाग के कर्मचारियों के लिए तैयार की जा रही है। लंबे समय से अपने गृह जनपद से दूर कार्यरत या पारिवारिक कारणों से स्थानांतरण चाहने वाले कर्मचारियों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है।

मंत्री ने क्या कहा
ग्राम्य विकास मंत्री भरत चौधरी ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और वे सिफारिशों के बजाय अपने दायित्वों पर अधिक ध्यान दे पाएंगे।

कैबिनेट की मंजूरी जरूरी
फिलहाल यह योजना प्रस्ताव के स्तर पर है। इसे लागू करने से पहले कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक होगी। आगामी बैठक में इसे प्रस्तुत किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

कर्मचारी संगठनों का समर्थन
कर्मचारी संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पारदर्शी तरीके से लागू होने पर इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और कार्य संस्कृति में सुधार आएगा।

पर्वतीय क्षेत्रों में संतुलन बड़ी चुनौती
हालांकि, इस योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न क्षेत्रों में कर्मचारियों का संतुलन बनाए रखना होगा। यदि अधिकांश कर्मचारी मैदानी क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हैं, तो पर्वतीय जिलों में पद रिक्त होने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में सरकार को योजना लागू करते समय संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भविष्य में अन्य विभाग भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

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