हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में रविवार को गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया, जहां पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को गलत शव सौंप दिया गया। घटना का खुलासा तब हुआ जब अंतिम दर्शन के दौरान परिजनों ने शव की पहचान की, जिसके बाद अस्पताल परिसर में हंगामा खड़ा हो गया।

जानकारी के अनुसार, पनियाली निवासी 64 वर्षीय रमेश चंद्र भट्ट ने 17 जून को जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें एसटीएच में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल प्रशासन ने शव परिजनों को सौंप दिया।
परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए घर ले गए, लेकिन अंतिम दर्शन के दौरान जब उन्होंने शव का चेहरा देखा तो वे हैरान रह गए। जांच में सामने आया कि उन्हें सौंपा गया शव बागेश्वर जिले के चिड़ंग गांव निवासी 40 वर्षीय मनोज सिंह का था, जिनकी भी अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु हुई थी।
दोनों परिवारों में मची अफरा-तफरी
घटना की जानकारी मिलते ही दोनों परिवारों में हड़कंप मच गया। गुस्साए परिजन शव को वापस अस्पताल लेकर पहुंचे और मोर्चरी के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। संयोग से दूसरे मृतक के परिजन भी उसी समय अस्पताल में मौजूद थे, जिसके बाद मामला और तनावपूर्ण हो गया।
मोर्चरी प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने अस्पताल की शव पहचान और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि शव सौंपने से पहले पहचान की प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसके चलते इतनी बड़ी चूक हुई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही न केवल प्रशासनिक खामियों को उजागर करती है, बल्कि शोक में डूबे परिवारों की भावनाओं को भी गहरा आघात पहुंचाती है।
फिलहाल, मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन पर कार्रवाई और जांच की मांग तेज हो गई है।





