नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के सिग्नल एवं टेलीकम्युनिकेशन (S&T) कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर 24 जून को देशभर में ‘डिमांड डे’ मनाएंगे। इस दौरान पूरे रेल नेटवर्क पर विरोध प्रदर्शन कर कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि उनकी कार्य स्थितियां लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। यूनियन के मुताबिक, हर साल लेवल क्रॉसिंग गेट की मरम्मत के दौरान ड्यूटी पर तैनात दो दर्जन से अधिक कर्मचारी हादसों में अपनी जान गंवा देते हैं।
काम के घंटे और सुरक्षा पर उठे सवाल
S&T कर्मचारियों का कहना है कि सिग्नल फेल होने की स्थिति में उन्हें बिना निर्धारित ड्यूटी रोस्टर के, कई बार कार्य समय के बाद भी बुलाया जाता है। यह ‘कार्य के घंटे और विश्राम अवधि नियम (HOER 2005)’ का उल्लंघन है, जिससे न केवल कर्मचारियों पर दबाव बढ़ता है बल्कि ट्रेन संचालन और यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
बार-बार उठाई गई मांगें, समाधान नहीं
इंडियन रेलवे सिग्नल एंड टेलीकॉम मेंटेनर्स यूनियन (IRSTMU) के महासचिव आलोक चंद्र प्रकाश ने बताया कि कर्मचारियों ने रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड को कई बार ज्ञापन सौंपे, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
उन्होंने कहा कि “कर्मचारियों ने हर स्तर पर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण अब ‘डिमांड डे’ के जरिए सामूहिक विरोध का निर्णय लिया गया है।”
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो 5 नवंबर को दोपहर 12 से 2 बजे तक ‘टूल डाउन’ आंदोलन किया जाएगा, जिसमें कर्मचारी काम बंद कर विरोध दर्ज कराएंगे।
काम का बढ़ता दबाव और स्वास्थ्य पर असर
यूनियन के अनुसार, S&T स्टाफ पर बढ़ता कार्यभार और अनियमित ड्यूटी शेड्यूल उनके स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है। कई कर्मचारी तनाव, डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही, विभाग में जारी लगभग 70 प्रतिशत चार्जशीट इलेक्ट्रिकल सिग्नल मेंटेनर्स (ESMs) को दिए जाने से कार्यभार असंतुलन की स्थिति भी सामने आई है।
लंबित भत्तों पर भी अटका मामला
IRSTMU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन कुमार ने बताया कि जोखिम और कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ‘रिस्क और हार्डशिप अलाउंस’ को लेकर बनी समिति अपनी सिफारिशें दे चुकी है, लेकिन अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर जल्द समाधान निकालेगी।
कर्मचारियों का कहना है कि वे टकराव नहीं, बल्कि समाधान चाहते हैं। हालांकि, लगातार अनदेखी की स्थिति में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।





