आगरा: देशभर में NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन और दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं, सोशल मीडिया और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार को आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति से असहज विदेशी ताकतें आधुनिक तकनीक, सोशल मीडिया और विदेशी फंडिंग का दुरुपयोग कर समाज में भ्रम, विद्वेष और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और उच्च शिक्षण संस्थानों से युवाओं को भ्रामक सूचनाओं से बचाने और उन्हें राष्ट्रहित की सोच से जोड़ने का आह्वान किया।
‘सोशल मीडिया से हो रहा युवाओं का दिग्भ्रमित होना’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज देश के लगभग 60 प्रतिशत युवा स्मार्टफोन, यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया को समझने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कई बार गुमनाम प्लेटफॉर्म पर प्रसारित असत्यापित जानकारी को युवा सच मान लेते हैं, जिससे समाज में भ्रम और अराजकता की स्थिति पैदा होती है।
उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे छात्रों को सत्य और असत्य के बीच अंतर समझाएं तथा उन्हें प्रमाणिक और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेने के लिए प्रेरित करें।

‘गूगल पर मौजूद हर जानकारी सही नहीं होती’
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटरनेट और गूगल पर उपलब्ध हर सामग्री प्रमाणिक नहीं होती। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे विद्यार्थियों को पुस्तकालयों, शोध पत्रों और संदर्भ ग्रंथों की ओर वापस ले जाएं, ताकि वे तथ्यात्मक और प्रमाणिक ज्ञान हासिल कर सकें।

AI और नई तकनीकों को अपनाने पर दिया जोर
सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों का उल्लेख करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक के सकारात्मक उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन टेक्नोलॉजी, 3डी प्रिंटिंग और रोबोटिक्स भविष्य की जरूरत हैं और भारत इनसे दूरी नहीं बना सकता।
उन्होंने विश्वविद्यालयों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत ड्यूल डिग्री, आधुनिक पाठ्यक्रम और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग शुरू की है, जिसका लाभ उच्च शिक्षण संस्थानों को भी उठाना चाहिए।

‘कक्षाएं रोचक बनाएं, छात्र खुद जुड़ेंगे’
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि पढ़ाने का तरीका समय के अनुसार बदलना होगा। यदि कक्षाएं अधिक रोचक और व्यवहारिक होंगी तो छात्र बोरियत महसूस नहीं करेंगे और उनकी पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी।
‘विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान न बनें’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा में गुरु केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि छात्रों की प्रतिभा को निखारने वाला मार्गदर्शक होता था। उन्होंने तक्षशिला विश्वविद्यालय और प्रसिद्ध वैद्य जीवक का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, शोध और राष्ट्र निर्माण करना है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को नवाचार, अनुसंधान और राष्ट्रभक्ति के ऐसे केंद्र के रूप में विकसित करना होगा, जो समाज को सकारात्मक दिशा देने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
NEET विवाद के बीच आया बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान ऐसे समय आया है, जब NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का आंदोलन जारी है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई के बीच शिक्षा व्यवस्था और सरकार की भूमिका को लेकर लगातार राजनीतिक बहस चल रही है। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को युवाओं का मार्गदर्शक बताते हुए उन्हें सोशल मीडिया के दुष्प्रचार से बचाने और राष्ट्रहित की भावना से जोड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति आशु रानी, केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, प्रभारी मंत्री भूपेंद्र चौधरी, सांसद राजकुमार चाहर सहित कई जनप्रतिनिधि और शिक्षाविद मौजूद रहे।





