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दुनिया को समझने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कई बार गुमनाम प्लेटफॉर्म पर प्रसारित असत्यापित जानकारी को युवा सच मान लेते हैं, जिससे समाज में भ्रम और अराजकता की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे छात्रों को सत्य और असत्य के बीच अंतर समझाएं तथा उन्हें प्रमाणिक और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेने के लिए प्रेरित करें। 'गूगल पर मौजूद हर जानकारी सही नहीं होती' मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटरनेट और गूगल पर उपलब्ध हर सामग्री प्रमाणिक नहीं होती। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे विद्यार्थियों को पुस्तकालयों, शोध पत्रों और संदर्भ ग्रंथों की ओर वापस ले जाएं, ताकि वे तथ्यात्मक और प्रमाणिक ज्ञान हासिल कर सकें। AI और नई तकनीकों को अपनाने पर दिया जोर सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों का उल्लेख करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक के सकारात्मक उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन टेक्नोलॉजी, 3डी प्रिंटिंग और रोबोटिक्स भविष्य की जरूरत हैं और भारत इनसे दूरी नहीं बना सकता। उन्होंने विश्वविद्यालयों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत ड्यूल डिग्री, आधुनिक पाठ्यक्रम और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग शुरू की है, जिसका लाभ उच्च शिक्षण संस्थानों को भी उठाना चाहिए। 'कक्षाएं रोचक बनाएं, छात्र खुद जुड़ेंगे' मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि पढ़ाने का तरीका समय के अनुसार बदलना होगा। यदि कक्षाएं अधिक रोचक और व्यवहारिक होंगी तो छात्र बोरियत महसूस नहीं करेंगे और उनकी पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी। 'विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान न बनें' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा में गुरु केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि छात्रों की प्रतिभा को निखारने वाला मार्गदर्शक होता था। उन्होंने तक्षशिला