नैनीताल: उत्तराखंड के तकनीकी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को हटाए जाने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने पर खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए विश्वविद्यालयों और तकनीकी कॉलेजों के रजिस्ट्रारों से जवाब मांगा है।
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मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट आदेश दिया था कि नियमित नियुक्तियां होने तक कार्यरत संविदा कर्मचारियों को सेवा से नहीं हटाया जाएगा, तो फिर उनका अनुबंध समाप्त होने के आधार पर सेवाएं क्यों समाप्त की गईं?
कोर्ट ने सभी संबंधित रजिस्ट्रारों को निर्देश दिए हैं कि वे आगामी मंगलवार (4 अगस्त) तक शपथपत्र दाखिल कर आदेश के अनुपालन की जानकारी दें। यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो उन्हें स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर यह बताना होगा कि न्यायालय के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।
पहले भी जारी हो चुका था स्पष्ट आदेश
हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में साफ कहा था कि जिन पदों पर संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, उन पदों पर नियमित नियुक्ति होने तक किसी अन्य संविदा कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की जा सकती। इसके बावजूद संबंधित संस्थानों द्वारा नए संविदा कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने पर कोर्ट ने गंभीर आपत्ति जताई।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला गौरव सेमवाल सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने 28 मई 2026 को शासनादेश जारी कर सभी विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद 8 सितंबर 2026 को तकनीकी शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को पत्र भेजकर संविदा कर्मचारियों की सेवाएं वर्ष 2026 तक बढ़ाने की जानकारी दी थी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 16 जून 2026 को एक नया आदेश जारी कर संविदा कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त कर दिया और उन्हीं पदों पर नई संविदा भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया, जो हाईकोर्ट के आदेश और शासनादेश दोनों के विपरीत है।
4 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। तब तक कोर्ट ने सभी संबंधित तकनीकी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों के रजिस्ट्रारों को आदेश के अनुपालन पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यदि आदेशों की अवहेलना पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।





