देहरादून: उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के पहले चरण के पूरा होने के बाद अब दूसरे चरण की प्रक्रिया जारी है। इस दौरान निर्वाचन आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज 19,04,380 मतदाताओं की जानकारी में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां पाए जाने पर उन्हें नोटिस जारी किए हैं। आयोग का कहना है कि नोटिस का उद्देश्य मतदाता विवरण में त्रुटियों का सुधार करना है, जबकि इस मुद्दे पर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने 14 जुलाई को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी। सूची के अनुसार राज्य में कुल 71,33,785 मतदाता दर्ज हैं। इनमें लगभग 27 प्रतिशत मतदाताओं के आवेदन या विवरण में तकनीकी अथवा दस्तावेज संबंधी त्रुटियां सामने आई हैं। इन्हीं विसंगतियों को दूर करने के लिए संबंधित मतदाताओं से जवाब मांगा गया है।
कैंप लगाकर होगी सुनवाई
निर्वाचन आयोग ने बताया कि नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए न्याय पंचायत स्तर पर क्लस्टर कैंप आयोजित किए जाएंगे। मैदानी क्षेत्रों में तहसील, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर भी विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहां मतदाता अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर त्रुटियों का निस्तारण करा सकेंगे।
किन जिलों में सबसे अधिक मामले?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक विसंगतियां देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिलों में दर्ज की गई हैं।
- देहरादून: 3,95,868 मामले
- हरिद्वार: 3,90,312 मामले
- उधम सिंह नगर: 3,36,164 मामले
- नैनीताल: 1,88,054 मामले
- पौड़ी गढ़वाल: 1,05,945 मामले
- टिहरी गढ़वाल: 1,04,402 मामले
अन्य जिलों में भी हजारों मतदाताओं के विवरण में विसंगतियां दर्ज की गई हैं, जिनके सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
किन कारणों से भेजे गए नोटिस?
निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदाता विवरण में आठ प्रमुख प्रकार की विसंगतियां सामने आई हैं। इनमें परिवार के सदस्यों की आयु में असामान्य अंतर, नाम या रिश्ते से संबंधित त्रुटियां, एक ही परिवार में असामान्य प्रविष्टियां, स्वयं मतदाता के नाम में गलती तथा पिछली मतदाता सूची से संबंधित अनमैप्ड रिकॉर्ड जैसी समस्याएं शामिल हैं। इन सभी मामलों में संबंधित मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर जानकारी स्पष्ट करने का अवसर दिया जा रहा है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने आयोग की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस भेजकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे मतदाता अपने अधिकारों के प्रयोग से पीछे हट सकते हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रत्येक मतदाता की सहायता करने और उनके मतदान अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री धामी ने बताया सामान्य प्रक्रिया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे मामले को निर्वाचन आयोग की नियमित प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण और पुनरीक्षण के दौरान पात्र और अपात्र मतदाताओं का सत्यापन किया जाता है। जिन लोगों के नाम गलत तरीके से दर्ज हुए हैं, जो अब राज्य में निवास नहीं करते या पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते, उनके मामलों का नियमानुसार परीक्षण किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रिया अन्य राज्यों में भी अपनाई जाती है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है।
आयोग ने जारी की मान्य दस्तावेजों की सूची
निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं के सत्यापन के लिए कई दस्तावेजों को मान्य माना है। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिक या अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, सरकारी पहचान पत्र, पेंशन भुगतान आदेश, परिवार रजिस्टर, भूमि अथवा मकान आवंटन प्रमाण पत्र सहित अन्य वैध सरकारी दस्तावेज शामिल हैं। आधार कार्ड के संबंध में आयोग ने पूर्व में जारी अपने दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया अपनाने की बात कही है।
फिलहाल निर्वाचन आयोग की ओर से नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं को निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। इसके बाद प्राप्त जवाबों के आधार पर अंतिम मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।





