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और सुरक्षा पर उठे सवाल S&T कर्मचारियों का कहना है कि सिग्नल फेल होने की स्थिति में उन्हें बिना निर्धारित ड्यूटी रोस्टर के, कई बार कार्य समय के बाद भी बुलाया जाता है। यह ‘कार्य के घंटे और विश्राम अवधि नियम (HOER 2005)’ का उल्लंघन है, जिससे न केवल कर्मचारियों पर दबाव बढ़ता है बल्कि ट्रेन संचालन और यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। बार-बार उठाई गई मांगें, समाधान नहीं इंडियन रेलवे सिग्नल एंड टेलीकॉम मेंटेनर्स यूनियन (IRSTMU) के महासचिव आलोक चंद्र प्रकाश ने बताया कि कर्मचारियों ने रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड को कई बार ज्ञापन सौंपे, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
उन्होंने कहा कि “कर्मचारियों ने हर स्तर पर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण अब ‘डिमांड डे’ के जरिए सामूहिक विरोध का निर्णय लिया गया है।” आंदोलन तेज करने की चेतावनी यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो 5 नवंबर को दोपहर 12 से 2 बजे तक ‘टूल डाउन’ आंदोलन किया जाएगा, जिसमें कर्मचारी काम बंद कर विरोध दर्ज कराएंगे। काम का बढ़ता दबाव और स्वास्थ्य पर असर यूनियन के अनुसार, S&T स्टाफ पर बढ़ता कार्यभार और अनियमित ड्यूटी शेड्यूल उनके स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है। कई कर्मचारी तनाव, डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी