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प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना: सरकार ने आकांक्षी कृषि जिलों के लिए सेंट्रल नोडल ऑफिसर नियुक्त किए

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने योजना के तहत 100 कृषि जिलों की समीक्षा और निगरानी के लिए सेंट्रल नोडल ऑफिसर (CNOs) नियुक्त किए हैं। यह पहला ऐसा कार्यक्रम है जिसमें विशेष रूप से खेती और उससे जुड़े सेक्टर पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

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कार्मिक मंत्रालय, लोक शिकायतें और पेंशन तथा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी ऑफिस मेमोरेंडम के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत आकांक्षी कृषि जिलों की निगरानी के लिए सेंट्रल नोडल ऑफिसरों के अपॉइंटमेंट और रिप्लेसमेंट को मंजूरी दी है। कुछ जिलों में मौजूदा नोडल ऑफिसर बदले गए हैं, जबकि अन्य जिलों के लिए नए अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।

नियुक्त अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे पीएम धन-धान्य कृषि योजना के लक्ष्यों के तहत प्रोग्रेस का रिव्यू करें, परिणामों की मॉनिटरिंग करें और राज्य एवं जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने जुलाई 2025 में इस योजना को छह साल के लिए मंजूरी दी थी। योजना का प्रारंभ 2025-26 से होगा और इसमें कुल 100 जिलों को शामिल किया गया है। यह स्कीम नीति आयोग के आकांक्षी जिलों प्रोग्राम से प्रेरित है और इसका उद्देश्य खेती की उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना, सिंचाई व स्टोरेज सुविधाओं को बेहतर बनाना और किसानों के लिए लघु एवं दीर्घकालीन लोन तक पहुंच आसान करना है।

स्कीम के तहत चयनित 100 जिलों की पहचान तीन मुख्य मानकों पर की जाएगी: कम प्रोडक्टिविटी, कम फसल उत्पादन और कम क्रेडिट डिस्बर्समेंट। हर राज्य और संघ शासित क्षेत्र से कम से कम एक जिला शामिल होगा। योजना की प्रभावी प्लानिंग, इम्प्लीमेंटेशन और मॉनिटरिंग के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कमेटियां बनाई जाएंगी। जिला कृषि गतिविधियों का फाइनल प्लान जिला धन-धान्य समिति तैयार करेगी, जिसमें प्रोग्रेसिव किसान भी शामिल होंगे।

हर जिला अपने मासिक प्रदर्शन की निगरानी 117 इंडिकेटर वाले डैशबोर्ड के जरिए करेगा, जबकि नीति आयोग जिला प्लान का रिव्यू और मार्गदर्शन करेगा। सेंट्रल नोडल ऑफिसर नियमित रूप से योजना की समीक्षा करेंगे, ताकि योजना के लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सके।

इस योजना से खेती और उससे जुड़े सेक्टर में उत्पादकता और वैल्यू एडिशन बढ़ाने के साथ स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जैसे-जैसे इन 100 जिलों के प्रदर्शन संकेतक बेहतर होंगे, देश के मुख्य प्रदर्शन संकेतक भी स्वचालित रूप से सुधार होंगे, जिससे आत्मनिर्भर भारत और कृषि क्षेत्र की मजबूती सुनिश्चित होगी।

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