देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार कर्मचारियों और श्रमिकों के हित में लगातार अहम फैसले ले रही है। उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के बदले समान वेतन देने की घोषणा के बाद अब वन विभाग में कार्यरत सैकड़ों दैनिक श्रमिकों के लिए भी बड़ी राहत की तैयारी की जा रही है। सरकार ने वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार न्यूनतम वेतन देने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया है, जिसे मंत्रिमंडलीय उप समिति ने मंजूरी दे दी है।

वन विभाग के दैनिक श्रमिक जंगलों में गश्त, वन्यजीव प्रबंधन, वनाग्नि नियंत्रण और अवैध कटान रोकने जैसे जोखिम भरे और चुनौतीपूर्ण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उनके वेतनमान में सुधार का निर्णय लिया। इस उद्देश्य से वन मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया गया था।
उप समिति की बैठक में यह सिफारिश की गई कि वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को सातवें वेतन आयोग के अनुरूप न्यूनतम वेतन दिया जाए। समिति ने न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन तय करने पर सहमति जताई है। अब यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष रखा जाएगा और उनकी स्वीकृति के बाद इसे राज्य मंत्रिमंडल में पेश किया जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही वन विभाग के करीब 700 दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम 18 हजार रुपये मासिक वेतन का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत वर्ष 2020 में लगभग 300 दैनिक श्रमिकों को महंगाई भत्ता देने का आदेश जारी किया था, हालांकि उस समय सभी श्रमिकों को इसका लाभ नहीं मिल पाया था। शेष बचे दैनिक श्रमिकों को समान लाभ दिलाने के उद्देश्य से ही मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया गया था।
साल 2026 की शुरुआत में ही धामी सरकार ने हजारों उपनल कर्मचारियों को राहत दी है और अब वन विभाग के दैनिक श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन का रास्ता साफ होता दिख रहा है। यह फैसला न केवल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि उनके मनोबल को भी बढ़ाएगा।
सरकार लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि राज्य के कर्मचारियों और श्रमिकों के हित उसकी प्राथमिकता हैं। इसी क्रम में इन फैसलों को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस निर्णय के औपचारिक रूप से लागू होने की उम्मीद है, जिससे वन विभाग के दैनिक श्रमिकों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा।
वहीं दैनिक श्रमिकों का कहना है कि यदि सरकार न्यूनतम वेतन के साथ महंगाई भत्ता और एरियर भी देती है तो उन्हें और अधिक लाभ मिल सकेगा। दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पृथ्वी सिंह राणा ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के साथ अन्य लाभ भी दिए जाएं।





