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भरे और चुनौतीपूर्ण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उनके वेतनमान में सुधार का निर्णय लिया। इस उद्देश्य से वन मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया गया था। उप समिति की बैठक में यह सिफारिश की गई कि वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को सातवें वेतन आयोग के अनुरूप न्यूनतम वेतन दिया जाए। समिति ने न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन तय करने पर सहमति जताई है। अब यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष रखा जाएगा और उनकी स्वीकृति के बाद इसे राज्य मंत्रिमंडल में पेश किया जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही वन विभाग के करीब 700 दैनिक श्रमिकों को
न्यूनतम 18 हजार रुपये मासिक वेतन का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत वर्ष 2020 में लगभग 300 दैनिक श्रमिकों को महंगाई भत्ता देने का आदेश जारी किया था, हालांकि उस समय सभी श्रमिकों को इसका लाभ नहीं मिल पाया था। शेष बचे दैनिक श्रमिकों को समान लाभ दिलाने के उद्देश्य से ही मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया गया था। साल 2026 की शुरुआत में ही धामी सरकार ने हजारों उपनल कर्मचारियों को राहत दी है और अब वन विभाग के दैनिक श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन का रास्ता साफ होता दिख रहा है। यह फैसला न केवल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा,