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NEET फर्जी सर्टिफिकेट कांड: SIT की जांच में बड़ा खुलासा, दो गिरफ्तार; 12 संदिग्ध जांच के दायरे में

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देहरादून। उत्तराखंड में NEET UG के माध्यम से MBBS प्रवेश के लिए कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े मामले की जांच लगातार गहराती जा रही है। देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने मामले में कथित मास्टरमाइंड रूपेश पंडित और उसके सहयोगी अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने एक संगठित नेटवर्क की आशंका को और मजबूत किया है।

NEET UG MBBS Fake Certificate Scam: NEET UG MBBS Fake Certificate Scam 12 Suspects Under Investigation

पुलिस के अनुसार रूपेश पंडित स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत MBBS में प्रवेश दिलाने के नाम पर प्रति अभ्यर्थी करीब 45 लाख रुपये की डील करता था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि तीन अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस के तौर पर लिए गए थे, जबकि शेष राशि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद देने की बात तय हुई थी। SIT अब धनराशि के लेनदेन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कई अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों में एक ही स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर से संबंध दर्शाया गया था। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि इन दस्तावेजों को तैयार करने, सत्यापित कराने और इस्तेमाल करने में किन-किन लोगों की भूमिका रही। कुछ प्रमाणपत्रों में स्वतंत्रता सेनानी की तस्वीर कथित रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

SIT की प्रारंभिक जांच के अनुसार कथित नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर लोगों की भूमिकाएं तय थीं। आरोप है कि ऐसे अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से संपर्क किया जाता था जिन्हें NEET में अपेक्षित रैंक नहीं मिली थी या मनचाहे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद उनकी आवश्यकता के अनुसार दस्तावेज तैयार कराने और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जाती थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा।

पुलिस के मुताबिक बिहार निवासी रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से मेरठ में एक एजुकेशन कंसल्टेंसी संचालित कर रहा था। रिपोर्टों के अनुसार उसकी कंसल्टेंसी का नाम ‘Mecodo Pathshala’ बताया गया है। आरोप है कि इस माध्यम से देश और विदेश के मेडिकल तथा अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने का काम किया जाता था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क का दायरा उत्तराखंड से बाहर किन राज्यों तक फैला हुआ था।

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को जांच के लिए कब्जे में लिया गया है। SIT कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की मदद से नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर रही है। साथ ही बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अभ्यर्थियों से ली गई रकम किन खातों में पहुंची और उसका आगे किस प्रकार इस्तेमाल हुआ।

देहरादून पुलिस के अनुसार फिलहाल करीब 12 संदिग्धों की भूमिका जांच के दायरे में है। दस्तावेज तैयार करने, सत्यापन कराने, प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग देने अथवा फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है।

मामले की जांच अब केवल अभ्यर्थियों और कथित बिचौलियों तक सीमित नहीं है। फर्जी प्रमाणपत्रों के सत्यापन और जारी होने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया भी जांच के घेरे में आ गई है। इसी क्रम में देहरादून तहसील सदर के दो लेखपालों को निलंबित किया जा चुका है। प्रशासन की प्रारंभिक जांच में प्रमाणपत्रों के सत्यापन में लापरवाही की बात सामने आई है। अब यह जांच का विषय है कि संदिग्ध दस्तावेज प्रशासनिक स्तरों से गुजरकर प्रमाणित कैसे हुए।

फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर MBBS प्रवेश के मामले के सामने आने के बाद सरकार ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से जुड़े कई प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है, जबकि कुछ प्रवेश पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं। इसके अलावा अन्य आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की भी जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अब तक की कार्रवाई में 3 सितंबर को शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू हुई, 9 सितंबर को जिला स्तरीय जांच समिति गठित की गई, 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेंटटाउन थानों में मुकदमे दर्ज हुए, 18 सितंबर को SIT का गठन किया गया और 22 सितंबर को रूपेश पंडित व अरविंद कुमार की गिरफ्तारी की गई।

फिलहाल SIT पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने, उनका इस्तेमाल करने या प्रवेश प्रक्रिया में कथित रूप से शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

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