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था। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि इन दस्तावेजों को तैयार करने, सत्यापित कराने और इस्तेमाल करने में किन-किन लोगों की भूमिका रही। कुछ प्रमाणपत्रों में स्वतंत्रता सेनानी की तस्वीर कथित रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। SIT की प्रारंभिक जांच के अनुसार कथित नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर लोगों की भूमिकाएं तय थीं। आरोप है कि ऐसे अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से संपर्क किया जाता था जिन्हें NEET में अपेक्षित रैंक नहीं मिली थी या मनचाहे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद उनकी आवश्यकता के अनुसार दस्तावेज तैयार कराने और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जाती थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक बिहार निवासी रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से मेरठ में एक एजुकेशन कंसल्टेंसी संचालित कर रहा था। रिपोर्टों के अनुसार उसकी कंसल्टेंसी का नाम ‘Mecodo Pathshala’ बताया गया है। आरोप है कि इस माध्यम से देश और विदेश के मेडिकल तथा अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश
दिलाने का काम किया जाता था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क का दायरा उत्तराखंड से बाहर किन राज्यों तक फैला हुआ था। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को जांच के लिए कब्जे में लिया गया है। SIT कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की मदद से नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर रही है। साथ ही बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अभ्यर्थियों से ली गई रकम किन खातों में पहुंची और उसका आगे किस प्रकार इस्तेमाल हुआ। देहरादून पुलिस के अनुसार फिलहाल करीब 12 संदिग्धों की भूमिका जांच के दायरे में है। दस्तावेज तैयार करने, सत्यापन कराने, प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग देने अथवा फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है। मामले की जांच अब केवल अभ्यर्थियों और कथित बिचौलियों तक सीमित नहीं है। फर्जी प्रमाणपत्रों के सत्यापन और जारी होने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया भी जांच के घेरे में आ गई है। इसी क्रम में देहरादून तहसील सदर के दो लेखपालों