पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड में पंचायत चुनावों के बाद कई युवा चेहरे ग्राम प्रधान के रूप में उभरकर सामने आए हैं। इन्हीं में से एक हैं पौड़ी गढ़वाल जिले के पाबौ ब्लॉक स्थित कुई गांव की 23 वर्षीय साक्षी रावत, जिन्होंने कम उम्र में ग्राम पंचायत की कमान संभालकर विकास की नई मिसाल पेश की है। बीटेक की पढ़ाई पूरी कर चुकी साक्षी आधुनिक सोच और तकनीक के जरिए गांव के विकास को नई दिशा देने में जुटी हैं।

ग्राम प्रधान के रूप में एक साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी साक्षी रावत का कहना है कि यदि पंचायत स्तर पर योजनाओं का पारदर्शी और प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जाए, तो गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती हैं।
रोजगार, शिक्षा और पलायन रोकना पहली प्राथमिकता
साक्षी रावत का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता गांव के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर योजना और जनभागीदारी के जरिए गांवों का समग्र विकास संभव है।
उन्होंने बताया कि पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन को रोकना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण युवा गांव छोड़कर शहरों की ओर जा रहे हैं। ऐसे में गांवों में ही अवसर पैदा करना जरूरी है।

तीन बार दिल्ली और LBSNAA मसूरी से मिला सीखने का मौका
साक्षी रावत के कार्यों और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें अब तक तीन बार दिल्ली आमंत्रित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी का अध्ययन भ्रमण करने और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आईएएस अधिकारियों से संवाद करने का भी अवसर मिला।
साक्षी ने बताया कि इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के सामने पहाड़ी क्षेत्रों की वास्तविक समस्याएं, खासकर पलायन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे विस्तार से रखे। इस अनुभव से उन्हें पंचायत संचालन और ग्रामीण विकास की नई कार्यशैली सीखने का अवसर मिला।

बंद हो चुका है गांव का स्कूल, अब बदलाव की कोशिश
साक्षी रावत ने बताया कि उनके गांव की स्थिति चिंता का विषय है। छात्र संख्या लगातार कम होने के कारण गांव का स्कूल बंद हो चुका है और अधिकांश युवा रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके हैं। गांव में अब अधिकतर बुजुर्ग ही रह गए हैं।
उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य गांव में ऐसे विकास कार्य करना है, जिससे युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिले और उन्हें गांव छोड़ने की जरूरत न पड़े।

खेल सुविधाओं पर भी विशेष फोकस
साक्षी का मानना है कि बच्चों का विकास केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए। पढ़ाई के साथ खेल, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियां भी उतनी ही जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत को कम करने के लिए गांवों में खेल मैदान और आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में विभिन्न विभागों को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। स्वीकृति मिलने के बाद गांव में आधुनिक खेल मैदान विकसित किया जाएगा और बच्चों व युवाओं के लिए आवश्यक खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।

‘आदर्श गांव बनाना है लक्ष्य’
साक्षी रावत का कहना है कि ग्राम प्रधान के रूप में उनका पहला वर्ष काफी सकारात्मक रहा। इस दौरान उन्होंने गांव की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए। आने वाले वर्षों में उनका लक्ष्य कुई गांव को शिक्षा, रोजगार, खेल और बुनियादी सुविधाओं के मामले में एक आदर्श गांव के रूप में विकसित करना है।
जिला पंचायत राज अधिकारी ने की सराहना
जिला पंचायत राज अधिकारी जितेंद्र कुमार ने साक्षी रावत की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि आज के युवा ग्राम प्रधान नई सोच, नवाचार और बेहतर नेतृत्व क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। इसी उद्देश्य से उन्हें देश के विभिन्न राज्यों और प्रतिष्ठित संस्थानों के अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाता है, ताकि वे सफल विकास मॉडल को अपने गांवों में लागू कर सकें।

साक्षी रावत को उनके उत्कृष्ट कार्य और नेतृत्व क्षमता के लिए गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विशेष रूप से दिल्ली आमंत्रित किया जा चुका है।
कम उम्र में ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी संभाल रहीं साक्षी रावत आज उत्तराखंड के युवाओं, खासकर युवतियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। उनका मानना है कि यदि युवाओं को जिम्मेदारी और अवसर दिए जाएं, तो वे गांवों के विकास की दिशा बदल सकते हैं।






