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विस्तार करना है। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर योजना और जनभागीदारी के जरिए गांवों का समग्र विकास संभव है। उन्होंने बताया कि पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन को रोकना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण युवा गांव छोड़कर शहरों की ओर जा रहे हैं। ऐसे में गांवों में ही अवसर पैदा करना जरूरी है। तीन बार दिल्ली और LBSNAA मसूरी से मिला सीखने का मौका साक्षी रावत के कार्यों और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें अब तक तीन बार दिल्ली आमंत्रित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी का अध्ययन भ्रमण करने और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आईएएस अधिकारियों से संवाद करने का भी अवसर मिला। साक्षी ने बताया कि इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के सामने पहाड़ी क्षेत्रों की वास्तविक समस्याएं, खासकर पलायन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे विस्तार से रखे। इस अनुभव से उन्हें पंचायत संचालन और ग्रामीण विकास की नई कार्यशैली सीखने का अवसर मिला। बंद हो चुका है गांव का स्कूल, अब बदलाव की कोशिश साक्षी रावत
ने बताया कि उनके गांव की स्थिति चिंता का विषय है। छात्र संख्या लगातार कम होने के कारण गांव का स्कूल बंद हो चुका है और अधिकांश युवा रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके हैं। गांव में अब अधिकतर बुजुर्ग ही रह गए हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य गांव में ऐसे विकास कार्य करना है, जिससे युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिले और उन्हें गांव छोड़ने की जरूरत न पड़े। खेल सुविधाओं पर भी विशेष फोकस साक्षी का मानना है कि बच्चों का विकास केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए। पढ़ाई के साथ खेल, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियां भी उतनी ही जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत को कम करने के लिए गांवों में खेल मैदान और आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विभिन्न विभागों को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। स्वीकृति मिलने के बाद गांव में आधुनिक खेल मैदान विकसित किया जाएगा और बच्चों व युवाओं के लिए आवश्यक खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। 'आदर्श गांव बनाना है लक्ष्य' साक्षी रावत का कहना है