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उत्तराखंड: ऋषिकेश वन भूमि सर्वे के विरोध में NH जाम और पथराव करने पर 16 नामजद समेत 200 से अधिक पर मुकदमा दर्ज

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ऋषिकेश/देहरादून। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत वन विभाग द्वारा ऋषिकेश में अवैध अतिक्रमण हटाने और वन भूमि का सर्वे किए जाने के विरोध में शनिवार और रविवार को प्रदर्शन उग्र रूप में सामने आए। शनिवार को नेशनल हाईवे जाम किया गया, जबकि रविवार को लोग मनसा देवी रेलवे लाइन को ब्लॉक कर ट्रेनें रोकने पर मजबूर हुए। पुलिस पर पथराव की भी घटना सामने आई। इस मामले में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

RISHIKESH FOREST LAND SURVEY

पहला मामला: रायवाला में तैनात एसएसआई मनवर सिंह नेगी ने तहरीर दी कि शनिवार को सेक्टर-2 प्रभारी के रूप में मालवीय नगर पहुंचे थे। इस दौरान अमितग्राम में श्यामपुर बाईपास पर स्थानीय लोगों ने दोपहर 1:30 बजे से शाम 4 बजे तक हाईवे जाम रखा। पुलिस ने इस मामले में मोहन सिंह असवाल, वीरेंद्र रमोला, विनोद नाथ, हिमांशु पंवार, लालमणि रतूड़ी, निर्मला उनियाल, ऊषा चौहान और सचिन रावत के अलावा 218 अज्ञात महिला-पुरुषों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

दूसरा मामला: गुमानीवाला क्षेत्र में वन विभाग की महिला रेंजर के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की घटना में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पीड़ित रेंजर ने बताया कि 27 दिसंबर को सरकारी काम के दौरान उन्हें धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और वर्दी पकड़ने की कोशिश का सामना करना पड़ा। पुलिस आरोपियों की पहचान कर रही है।

Rishikesh forest land survey protest

तीसरा मामला: रविवार को मनसा देवी रेलवे फाटक पर हुई बलवा, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे मार्ग अवरुद्ध करने, पुलिस और प्रशासन पर पथराव करने के मामले में निरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट की तहरीर पर 8 नामजद और 8-10 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। नामजद आरोपियों में सीताराम कोटी, लालमणि रतूड़ी, योगेश डिमरी, विकास सेमवाल, जहांगीर आलम, गंगा प्रसाद, राजेंद्र गैरोला और पूजा पोखरियाल शामिल हैं।

एसपी देहात जया बलूनी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत वन विभाग द्वारा वन भूमि का सर्वे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। प्रदर्शनकारियों ने राजमार्ग और रेलवे मार्ग अवरुद्ध कर दिया, जिससे ट्रेनें लेट हुईं और हजारों यात्रियों को असुविधा हुई।

एसएसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने लाठीचार्ज नहीं किया और सोशल मीडिया पर ऐसी भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जनता से अपील की कि वन भूमि को निजी बताकर बेचे जाने की सूचना मिलने पर पुलिस को सूचित करें। इस प्रकार के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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