देहरादून। उत्तराखंड में दिव्यांगजनों को बेहतर शैक्षणिक और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रस्तावित रिसर्च सेंटर का काम फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रहा है। भारत सरकार के राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) की ओर से कुमाऊं क्षेत्र में कंपोजिट रिसर्च सेंटर स्थापित करने की योजना है, लेकिन राज्य सरकार के स्तर पर आवश्यक जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं होने से प्रस्ताव लंबित है।

संस्थान की योजना है कि काशीपुर, रुद्रपुर या हल्द्वानी क्षेत्र में यह केंद्र स्थापित किया जाए, ताकि कुमाऊं और पर्वतीय क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास के लिए देहरादून तक लंबी दूरी तय न करनी पड़े। संस्थान के मुताबिक, इस संबंध में राज्य सरकार के साथ पहले बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन उसके बाद अपेक्षित समन्वय नहीं हो पाया।
दूरदराज के दिव्यांग छात्रों को मिलेगा फायदा
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांग छात्रों के लिए देहरादून या अन्य मैदानी क्षेत्रों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुमाऊं क्षेत्र में रिसर्च सेंटर खोलने की पहल की जा रही है।
इस प्रस्तावित केंद्र में विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांगजनों के लिए एक ही स्थान पर कई सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें शैक्षणिक सहायता, आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराना, प्रशिक्षण और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे दिव्यांग छात्रों और उनके परिवारों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
जमीन की तलाश में संस्थान
रिसर्च सेंटर के लिए सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त जमीन की उपलब्धता है। संस्थान की ओर से कुमाऊं क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार से सहयोग की अपेक्षा की जा रही है।
NIEPVD के प्रभारी निदेशक विनोद कुमार केन के मुताबिक, इस मुद्दे पर पहले बातचीत हुई थी, लेकिन बाद में राज्य सरकार की ओर से समन्वय नहीं हो पाने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस दिशा में पहल करती है तो दिव्यांग छात्रों के लिए एक बेहतर संस्थान स्थापित किया जा सकता है।
रुद्रपुर की जमीन पर भी चर्चा
इस बीच रुद्रपुर में अल्पसंख्यक विभाग की जमीन को लेकर भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। विभाग के पास उपलब्ध जमीन पर निर्माण कार्य हो चुका है, लेकिन फिलहाल उसका उपयोग नहीं हो रहा है। ऐसे में NIEPVD की ओर से इस जमीन को रिसर्च सेंटर के लिए उपयोग किए जाने की संभावना पर चर्चा की गई है।
संस्थान के निदेशक ने इस संबंध में अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर से भी संपर्क किया है। विशेष सचिव ने बताया कि संस्थान की ओर से इस मामले में संपर्क किया गया है और विभाग आवश्यक सहयोग के लिए तैयार है।
सरकार की पहल से आगे बढ़ सकता है प्रस्ताव
NIEPVD का प्रस्ताव अमल में आने पर कुमाऊं समेत पर्वतीय क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को शिक्षा, उपकरण, प्रशिक्षण और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी। अब इस योजना की प्रगति काफी हद तक राज्य सरकार की ओर से जमीन उपलब्ध कराने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर है।





