देहरादून। भारतीय महिला क्रिकेट टीम के वनडे विश्व कप जीतने के बाद उत्तराखंड की बेटी स्नेह राणा शनिवार को देहरादून लौटीं, जहां जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूलों की वर्षा और जयघोष के बीच स्नेह राणा मुस्कुराते हुए अपने गृह राज्य की सरज़मीं पर पहुंचीं। इस ऐतिहासिक जीत में ऑलराउंडर स्नेह राणा ने अहम भूमिका निभाई और टूर्नामेंट में अपने शानदार प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया।

स्नेह राणा मूल रूप से देहरादून जिले के सिनेोला गांव की रहने वाली हैं। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे उनके भाई कमल राणा और भाभी ऋचा राणा ने बताया कि स्नेह ने इस सफलता के लिए अथक मेहनत की थी। चोट से उबरने के बाद उनकी मजबूत वापसी ने पूरे देश को प्रेरित किया।
एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में स्नेह राणा ने कहा, “यह जीत पूरे टीम की कड़ी मेहनत और एकजुटता का परिणाम है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मुलाकात का अनुभव बेहद यादगार रहा। उन्होंने हमारी मेहनत की सराहना करते हुए टीम का हौसला बढ़ाया।” स्नेह ने बताया कि राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर वह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से भी मुलाकात कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने दी बधाई, किया ₹50 लाख का ऐलान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्नेह राणा को फोन पर बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने राज्य और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार स्नेह राणा को ₹50 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी। उन्होंने कहा, “स्नेह राणा की मेहनत, लगन और प्रतिभा राज्य की बेटियों के लिए प्रेरणा है। सरकार खिलाड़ियों को सर्वोत्तम सुविधाएं और प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी किया सम्मान
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी स्नेह राणा के निवास पर पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि स्नेह का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड की बेटियां हर क्षेत्र में देश को गौरवान्वित कर रही हैं।
स्नेह राणा बोलीं – “देश और उत्तराखंड का नाम ऊंचा रखना ही मेरा लक्ष्य”
मुख्यमंत्री और राज्यवासियों से मिले प्यार के लिए आभार जताते हुए स्नेह राणा ने कहा, “यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश और उत्तराखंड की है। मेरा लक्ष्य है कि आने वाले समय में और मेहनत कर देश और अपने राज्य का नाम और ऊंचा करूं। उम्मीद है कि पहाड़ की और बेटियां भी खेलों में आगे बढ़ेंगी।”





