उत्तराखंड के पूर्व वन मंत्री और कांग्रेस नेता डॉ. हरक सिंह रावत ने दावा किया है कि उन्हें कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पाखरो सफारी मामले में सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी है। उनका नाम न तो सीबीआई और न ही ईडी के आरोप पत्र में शामिल है। हालांकि, मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।

डॉ. रावत ने कहा कि पेड़ काटने या छपान करने का काम मंत्री का नहीं होता। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया होती है, जो प्रशासनिक और वित्त विभाग की मंजूरी के बाद मंत्री के पास आती है। मंत्री की इसमें सीधी भूमिका नहीं रहती। उन्होंने कहा कि यदि कहीं गड़बड़ी होती है तो मंत्री केवल जांच के आदेश दे सकता है।
पूर्व वन मंत्री ने पाखरो टाइगर सफारी को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताया। उनका कहना है कि इस सफारी से पर्यटन को बढ़ावा मिलता, होटल उद्योग खड़ा होता और हजारों लोगों को रोजगार मिलता। यहां देश-विदेश से पर्यटक आते, जिससे करोड़ों की आमदनी होती।
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट से घायल और वृद्ध टाइगर की उम्र पांच से सात साल तक बढ़ सकती थी, क्योंकि जंगल में शिकार न कर पाने की स्थिति में ऐसे टाइगर अक्सर महिलाओं और बच्चों पर हमला कर देते हैं। उन्हें बाड़े में लाकर न केवल इंसान सुरक्षित रहते बल्कि टाइगर को भी आसानी से शिकार मिलता।
डॉ. रावत ने आरोप लगाया कि पाखरो प्रोजेक्ट को लेकर वन विभाग के कुछ बर्खास्त अधिकारी और रामनगर होटल लॉबी ने उनके खिलाफ साजिश रची। उनका कहना है कि इन लोगों ने दिल्ली के कुछ एनजीओ को भी इसमें शामिल किया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सच में हजारों पेड़ काटे गए होते तो इसकी जानकारी एसटीएफ और अन्य जांच एजेंसियों को जरूर मिलती।
क्या है मामला?
पाखरो रेंज की 106 हेक्टेयर भूमि में टाइगर सफारी प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिली थी। राज्य सरकार ने दावा किया था कि इस काम में केवल 163 पेड़ काटे जाएंगे। लेकिन आरोप है कि इसकी जगह करीब 6,903 पेड़ काट दिए गए, जिसके बाद यह पूरा विवाद खड़ा हुआ।





