Thursday, February 26, 2026
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डिजिटल जनगणना 2027: मोबाइल से होगा पूरा काम, ऐसे में जानें क्या है जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली

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नई दिल्ली: भारत की जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल तरीके से आयोजित की जाएगी। इस बार जनगणना प्रक्रिया का संचालन ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS)’ नामक उन्नत डिजिटल पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी संभव होगी।

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भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को जारी सर्कुलर में बताया कि आगामी जनगणना में डेटा संग्रहण और उसके प्रसंस्करण की गुणवत्ता, दक्षता और समयबद्धता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

32 लाख से अधिक फील्ड कर्मचारी होंगे तैनात

जनगणना 2027 में कम से कम 32 लाख फील्ड कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इस बार पारंपरिक कागज आधारित प्रणाली की जगह हैंडहेल्ड डिवाइस, मोबाइल ऐप, जियो-टैगिंग और केंद्रीकृत वेब प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा।

CMMS प्रणाली में वेब आधारित मैपिंग एप्लिकेशन शामिल है, जो हाउसलिस्टिंग ब्लॉक (HLBs) और एन्यूमरेशन ब्लॉक (EBs) की सटीक जियो-टैगिंग सुनिश्चित करेगा, जिससे डेटा ओवरलैप और त्रुटियों में कमी आएगी। सूत्रों के अनुसार, 6 लाख से अधिक इंटीग्रेटेड जीआईएस मैप पहले ही पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं।

मोबाइल ऐप और स्व-गणना की सुविधा

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय पहले ही संसद में स्पष्ट कर चुके हैं कि जनगणना डिजिटल माध्यम से होगी। डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा और नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी एक केंद्रीकृत वेब पोर्टल से होगी।

दो चरणों में होगी जनगणना

जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी—

  • पहला चरण: हाउसलिस्टिंग एवं आवास जनगणना (अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच)

  • दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (फरवरी 2027)

लद्दाख, जम्मू-कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले एवं दुर्गम क्षेत्रों में जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में ही कराई जाएगी।

राज्यों से मांगा गया सहयोग

हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जनगणना से जुड़ी गतिविधियों की नियमित समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने अधिकारियों की समय पर नियुक्ति और प्रशिक्षण, डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग और जनजागरूकता अभियान पर विशेष जोर दिया।

तकनीकी जनशक्ति और रोजगार

कैबिनेट के बयान के अनुसार, जनगणना कार्यों के लिए लगभग 18,600 तकनीकी कर्मियों को 550 दिनों के लिए तैनात किया जाएगा, जिससे करीब 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा। डिजिटल डेटा हैंडलिंग और समन्वय से जुड़ा यह अनुभव भविष्य में रोजगार के अवसरों को भी बढ़ाएगा।

11,718.24 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन

केंद्रीय कैबिनेट ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास माना जाता है।

जाति गणना भी होगी शामिल

जनगणना 2027 के दूसरे चरण, यानी जनसंख्या गणना में जाति संबंधी डेटा भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एकत्र किया जाएगा। लगभग 30 लाख से अधिक एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर और अन्य अधिकारी डेटा संग्रह और निगरानी में जुटेंगे।

16वीं जनगणना, आजादी के बाद 8वीं

जनगणना 2027 देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी। यह गांव, शहर और वार्ड स्तर पर आवास, जनसंख्या, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, साक्षरता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजनन दर जैसे कई मानकों पर विस्तृत डेटा उपलब्ध कराएगी।

कोविड-19 के कारण टली थी 2021 की जनगणना

कोविड-19 महामारी के चलते 2021 की जनगणना स्थगित कर दी गई थी। अब 2027 में इसे पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में आयोजित कर देश के विकास की भावी नीतियों के लिए सटीक और व्यापक आधार तैयार किया जाएगा।

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