हरिद्वार: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और NEET विवाद को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक हलचल के बीच उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार से भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि बिना स्पष्ट नेतृत्व वाले आंदोलन देश और समाज के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं और ऐसे आंदोलनों का कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आता।

हरिद्वार पहुंचे भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत के दौरान छात्र आंदोलन, संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़े सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पूछे गए सवाल के जवाब में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उन्हें इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे।
“जब तक मेरे पास पूरी जानकारी नहीं होगी, मैं इस विषय पर कुछ नहीं कह सकता।” – त्रिवेंद्र सिंह रावत, भाजपा सांसद
‘बिना नेतृत्व वाले आंदोलन भटक जाते हैं’
सीजेपी आंदोलन का जिक्र करते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि इस तरह के आंदोलनों में स्पष्ट नेतृत्व का अभाव होता है, जिससे इनके भटकने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलन यह तय नहीं कर पाते कि उन्हें किस दिशा में आगे बढ़ना है और अंततः उनका नुकसान देश और समाज दोनों को उठाना पड़ता है।
“जिन आंदोलनों का कोई मार्गदर्शक नहीं होता, वे अक्सर सकारात्मक निष्कर्ष तक नहीं पहुंचते। इससे सबसे ज्यादा नुकसान देश, समाज और उन्हीं लोगों का होता है, जिनके नाम पर आंदोलन किए जाते हैं।”
संसद न चलने के लिए विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार
संसद के मानसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे पर भी त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष के अड़ियल रवैये के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी।
उनका कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष ने भी कई बार विपक्ष से सदन चलाने की अपील की, लेकिन विपक्ष चर्चा की बजाय गतिरोध बनाए रखना चाहता था।
परीक्षा व्यवस्था में सरकार ने की कार्रवाई
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े मामलों में सरकार ने आवश्यक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित संस्थाओं में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और कई लोग जांच के दायरे में हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्र अपनी उम्र और अनुभव के कारण कई प्रशासनिक पहलुओं को नहीं समझ पाते, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि वह संवेदनशील मुद्दों पर संयम और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करे।
भाजपा सांसद ने अंत में कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन आंदोलन हमेशा सकारात्मक दिशा में और जिम्मेदार नेतृत्व के साथ होने चाहिए, ताकि देश और समाज का नुकसान न हो।





