विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने Form-6 से संबंधित एक अहम फैसला लिया है। आयोग ने SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन Form-6 प्रक्रिया से हटा दिया है, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वैधानिक Form-6 के मूल प्रारूप में कोई कानूनी संशोधन नहीं किया गया है।

अब सामान्य Form-6 से होगा आवेदन
Form-6 का इस्तेमाल पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए करते हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए वही Form-6 इस्तेमाल किया जाएगा, जो Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित है।
वहीं, जिन क्षेत्रों में SIR की प्रक्रिया जारी है, वहां SIR से संबंधित घोषणा की व्यवस्था बनी हुई है। आयोग की मतदाता सेवा वेबसाइट पर Form-6 और SIR से जुड़ी घोषणा के लिए अलग-अलग विकल्प भी उपलब्ध हैं।
क्या थी अतिरिक्त घोषणा?
SIR के दौरान ऑनलाइन Form-6 के साथ जो अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी, उसमें आवेदक से यह जानकारी मांगी जाती थी कि उसका नाम या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR के दौरान तैयार मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं। इस व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी सवाल उठे थे।
दो चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
इस मामले ने तब ज्यादा तूल पकड़ा, जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से Form-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त जानकारी शामिल किए जाने पर आपत्ति की खबर सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने इसे नियमों में औपचारिक संशोधन के बिना किया गया बदलाव बताते हुए सवाल उठाए थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा था कि वैधानिक Form-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और SIR के लिए अतिरिक्त घोषणा अलग आवश्यकता के रूप में जोड़ी गई थी। आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद यह भी कहा था कि गैर-SIR अवधि में नियमों के अनुरूप निर्धारित फॉर्म का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
26 सितंबर की बैठक में लिए गए थे कई फैसले
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में 26 सितंबर को हुई बैठक के बाद चुनाव आयोग ने SIR और ECINET से जुड़े कई फैसलों की जानकारी दी थी। आयोग ने कहा था कि SIR से संबंधित उसके फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी मिली है। साथ ही ECINET की कानूनी और तकनीकी अनुपालन व्यवस्था की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाने की बात भी कही गई थी।
Form-6 को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ?
Form-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी शामिल किए जाने की रिपोर्ट जुलाई में सामने आई थी। इस व्यवस्था के तहत नए मतदाताओं से पिछली SIR की मतदाता सूची में अपने या अपने माता-पिता की मौजूदगी से संबंधित जानकारी मांगी जा रही थी। इसे लेकर कानूनी प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र से जुड़े सवाल उठे थे।
अब SIR पूरा हो चुके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अतिरिक्त घोषणा हटाए जाने के बाद गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया निर्धारित वैधानिक Form-6 के आधार पर संचालित होगी। हालांकि, जिन क्षेत्रों में SIR अभी जारी है, वहां SIR से संबंधित प्रक्रियाएं लागू रहेंगी।





