देहरादून। Ganesh Joshi की एक पहल इन दिनों चर्चा और विवाद दोनों का विषय बन गई है। पेट्रोल बचत और सादगी का संदेश देने के उद्देश्य से मंत्री ने गढ़ी कैंट में आयोजित कार्यक्रम के बाद सरकारी वाहन के बजाय स्कूटी से अपने आवास तक जाने का निर्णय लिया। हालांकि, बाद में सामने आई जानकारी ने इस पहल को सवालों के घेरे में ला दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, जिस स्कूटी पर मंत्री सवार होकर गए, उसके जरूरी दस्तावेज—इंश्योरेंस और प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC)—समाप्त पाए गए। ऐसे में यातायात नियमों के उल्लंघन को लेकर मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
सरकारी वाहन साथ चलने पर उठे सवाल
घटना से जुड़ी एक और बात यह सामने आई कि स्कूटी के पीछे मंत्री का सरकारी वाहन भी चल रहा था। इसे लेकर लोगों ने सवाल किया कि जब सुरक्षा और सरकारी वाहन साथ मौजूद था, तो स्कूटी से जाने का संदेश कितना प्रभावी माना जाए। इस पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं—कुछ ने इसे दिखावा बताया, तो कुछ ने मंत्री की पहल की सराहना की।
स्टाफ ने मांगा जुर्माना लगाने का अनुरोध
बाद में स्पष्ट हुआ कि स्कूटी मंत्री के स्टाफ सदस्य की थी। दस्तावेजों के एक्सपायर होने की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित कर्मचारी ने एसएसपी को पत्र लिखकर नियमों के उल्लंघन पर लागू जुर्माना लगाने का अनुरोध किया है। इस कदम को कई लोग जिम्मेदारी स्वीकार करने के रूप में देख रहे हैं।
आगे भी दोपहिया इस्तेमाल का संकेत
विवाद के बाद मंत्री गणेश जोशी ने स्पष्ट किया कि वह भविष्य में भी छोटी दूरी के लिए दोपहिया वाहनों का उपयोग करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी के लिए सरकारी वाहनों का उपयोग होगा, लेकिन काफिले में वाहनों की संख्या कम करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया।





