Tuesday, February 10, 2026
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स्वदेशी दीपावली मेले से बढ़ी रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा की लोकप्रियता

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रुद्रपुर, उत्तराखंड का एक औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्र, इस दीपावली पर स्वदेशी उत्सव की रोशनी से जगमगा उठा। नगर निगम द्वारा गांधी पार्क में आयोजित उत्तराखंड के पहले ‘स्वदेशी दीपावली मेले’ ने न केवल स्थानीय व्यापारियों को सशक्त किया, बल्कि महापौर विकास शर्मा की लोकप्रियता को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वदेशी अपनाओ’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान को मूर्त रूप देते हुए, शर्मा ने इस मेले को एक ऐतिहासिक आयोजन बना दिया। 14 से 21 अक्टूबर 2025 तक चले इस मेले में 300 से अधिक स्टॉल्स, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, और हजारों की भीड़ ने इसे यादगार बना दिया। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स और स्थानीय लोगों की तारीफों ने साबित कर दिया कि विकास शर्मा न केवल रुद्रपुर के मेयर हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सच्चे सिपाही भी हैं।

स्वदेशी दीपावली मेला: रुद्रपुर में आत्मनिर्भरता का उत्सव

रुद्रपुर के गांधी पार्क में 14 अक्टूबर को शुरू हुआ यह मेला 21 अक्टूबर तक चला, जिसका उद्घाटन महापौर विकास शर्मा, जिलाधिकारी नितिन भदौरिया, और नगर आयुक्त नरेश चंद्र दुर्गापाल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। मेले की थीम ‘स्वदेशी अपनाओ’ थी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को समर्पित थी। मेले में 300 से अधिक स्टॉल्स लगाए गए, जिनमें स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों ने मिट्टी के दीये, खादी वस्त्र, ऊनी शॉल, हर्बल उत्पाद, हस्तशिल्प, और पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया।

महापौर शर्मा ने उद्घाटन समारोह में कहा, “यह मेला छोटे व्यापारियों को सम्मानजनक मंच प्रदान करने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का एक प्रयास है। यह न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवित रखता है।” मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। एलकेडी डांस स्टूडियो, महिला समूहों, और स्कूली बच्चों ने उत्तराखंडी लोक नृत्य, देशभक्ति गीत, नौ देवियों पर आधारित प्रस्तुतियां, और आधुनिक नृत्यों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 19 अक्टूबर को भारी भीड़ ने मेले की लोकप्रियता को और उजागर किया, और अनुमानित कारोबार 35 लाख रुपये से अधिक रहा।

महज तीन दिनों मे पूरी की गई मेले की तैयारियां

विकास शर्मा, जो फरवरी 2025 में रुद्रपुर के महापौर बने, ने इस मेले को अपनी नेतृत्व क्षमता का एक शानदार उदाहरण बनाया। 12,000 वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर मेयर बने शर्मा ने अपनी संगठनात्मक कुशलता और जनसंपर्क से सभी का दिल जीत लिया। मेले की तैयारियां महज तीन दिनों में पूरी की गईं, जिसमें स्टॉल आवंटन पारदर्शी लॉटरी प्रणाली से किया गया। शर्मा ने पुलिस, व्यापार मंडल, और नगर निगम के साथ मिलकर ट्रैफिक और अव्यवस्था की समस्याओं को नियंत्रित किया, जिससे शहरवासियों को सुरक्षित और व्यवस्थित खरीदारी का अनुभव मिला।

स्थानीय निवासी रमेश जोशी ने कहा, “मेयर साहब ने मेले में खुद स्टॉल्स का दौरा किया और कारीगरों से बात की। उनकी सादगी और स्वदेशी के प्रति जोश देखकर हम गर्व महसूस करते हैं।” एक महिला कारीगर, लक्ष्मी देवी, ने बताया, “मेरे हस्तशिल्प को इस मेले में इतना प्यार मिला कि मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया। यह सब शर्मा जी की वजह से संभव हुआ।”

लोकप्रियता में उछाल: जनसंपर्क और नीतिगत प्रभाव

  1. मोदी के विजन का स्थानीय कार्यान्वयन: शर्मा ने ‘वोकल फॉर लोकल’ को रुद्रपुर में साकार किया। सांसद अजय भट्ट ने मेले की तारीफ करते हुए कहा, “यह मेला वोकल फॉर लोकल की परिकल्पना को साकार कर रहा है। मेयर शर्मा और उनकी टीम बधाई की पात्र है।”
  2. पारदर्शिता और समावेशिता: स्टॉल आवंटन में पारदर्शी लॉटरी और गरीब व्यापारियों को मामूली किराए पर स्टॉल उपलब्ध कराने से छोटे कारोबारियों में विश्वास बढ़ा। मेले में महिलाओं और दिव्यांग कारीगरों को विशेष स्थान दिया गया।
  3. प्रभावी प्रशासन: ट्रैफिक नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था, और सड़कों पर ठेली बिक्री पर प्रतिबंध जैसे कदमों से शहर में व्यवस्था बनी रही। जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने भी आयोजन की सराहना की, कहा कि यह स्थानीय उत्पादों को बाजार और व्यापारियों को आत्मनिर्भरता प्रदान करता है।
  4. सांस्कृतिक एकीकरण: उत्तराखंडी लोक संस्कृति और आधुनिक प्रस्तुतियों के मिश्रण ने मेले को सभी आयु वर्ग के लिए आकर्षक बनाया।

आर्थिक उछाल और सामाजिक समरसता

स्वदेशी दीपावली मेले ने रुद्रपुर की अर्थव्यवस्था को गति दी। छोटे व्यापारियों और कारीगरों को डायरेक्ट मार्केट मिला, जिससे उनकी बिक्री में उछाल आया। उपभोक्ताओं को सस्ते और पर्यावरण-अनुकूल स्वदेशी उत्पाद एक ही स्थान पर उपलब्ध हुए। सामाजिक स्तर पर, मेले ने विभिन्न समुदायों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा दिया। नौ देवियों पर आधारित प्रस्तुतियां और बच्चों के प्रदर्शन ने मेले को पारिवारिक उत्सव का रूप दिया।

मेले ने पीएम स्वनिधि योजना और मुख्यमंत्री उद्यमी विकास अभियान जैसे सरकारी कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया। कई व्यापारियों को ऋण और प्रशिक्षण के अवसर मिले, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

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