देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र के बिधोली गांव में साइबर ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। यहां साइबर ठगों ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर एक दंपती को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और उनसे 45.85 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने दंपती को आतंकवादी हमले में मोबाइल नंबर के इस्तेमाल और उनके बच्चों की सुरक्षा को लेकर डराया। पीड़ितों ने आठ अक्टूबर को पुलिस से शिकायत कर रकम वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ATS और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर किया फोन
शिकायत के अनुसार, विजयपाल धीमान और उनकी पत्नी पुष्पा धीमान को 16 अगस्त के आसपास अज्ञात लोगों के फोन आने शुरू हुए। फोन करने वालों ने खुद को मुंबई स्थित ATS मुख्यालय और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। इनमें से एक व्यक्ति ने अपना नाम सब-इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया।
आरोपियों ने दंपती से कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी हमले में किया गया है और वे जांच के घेरे में हैं। इसके बाद उन्हें कार्रवाई में फंसाने की धमकी दी गई। ठगों ने दंपती के तीनों बच्चों के बारे में जानकारी लेकर उनकी जान को खतरा होने की बात भी कही। इससे दंपती भयभीत हो गए और आरोपियों के निर्देशों का पालन करने लगे।
60 घंटे तक वीडियो कॉल पर रखा, किसी से बात नहीं करने दी
शिकायत में बताया गया है कि साइबर ठग लगातार फोन और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए दंपती के संपर्क में रहे। उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से बात नहीं करने दी गई। ठगी के अंतिम चरण में एक वीडियो कॉल करीब 60 घंटे तक जुड़ी रही।
आरोपियों ने जांच का हवाला देते हुए दंपती को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के खाते में रकम जमा कराने के लिए कहा। डर के कारण दंपती ने किसी को इसकी जानकारी नहीं दी और आरोपियों के निर्देश पर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करते रहे।
पांच बार में ट्रांसफर किए 45.85 लाख रुपये
पीड़ितों के मुताबिक, 21 से 27 अगस्त के बीच पांच अलग-अलग लेनदेन में कुल 45.85 लाख रुपये जमा किए गए। इनमें चार बार RTGS के माध्यम से रकम ट्रांसफर की गई, जबकि एक बार बैंक शाखा में नकद जमा कराया गया।
शिकायत में जिन खातों में रकम जमा कराने का उल्लेख है, उनमें सनातन ट्रेडर्स के नाम पर 15 लाख रुपये, प्रागज्योतिष एंटरप्राइजेज के खाते में 11.35 लाख रुपये, इंटीमेटेक्स प्राइवेट लिमिटेड के खाते में 11.50 लाख रुपये, शांबा मुराम के नाम पर पांच लाख रुपये और आदित्य संदीप महाराज के नाम से जुड़े खाते में तीन लाख रुपये शामिल हैं।
आरोप है कि रकम मिलने के बाद भी ठगों ने दंपती पर दबाव बनाना जारी रखा और उन्हें जमीन बेचकर अतिरिक्त पैसे देने के लिए कहा।
बेटी के घर पहुंचने पर खुला मामला
तीन अक्टूबर को दंपती की बेटी अचानक घर पहुंची। उसने अपने माता-पिता को लंबे समय से वीडियो कॉल पर बात करते देखा तो इसकी वजह पूछी। इस दौरान दंपती घबरा गए और उन्होंने कॉल काट दी। इसके बाद आरोपियों की ओर से दोबारा फोन नहीं आया।
बाद में दंपती ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की। आठ अक्टूबर को दी गई शिकायत में उन्होंने संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने, संदिग्ध लेनदेन की जांच कराने, आरोपियों की पहचान करने और ठगी गई रकम वापस दिलाने की मांग की है।
यह मामला एक बार फिर साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट के तरीके को उजागर करता है, जिसमें आरोपी पुलिस या जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को गिरफ्तारी, आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता और परिवार को नुकसान पहुंचाने का डर दिखाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए और तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।





