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का अधिकारी बताया। इनमें से एक व्यक्ति ने अपना नाम सब-इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया। आरोपियों ने दंपती से कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी हमले में किया गया है और वे जांच के घेरे में हैं। इसके बाद उन्हें कार्रवाई में फंसाने की धमकी दी गई। ठगों ने दंपती के तीनों बच्चों के बारे में जानकारी लेकर उनकी जान को खतरा होने की बात भी कही। इससे दंपती भयभीत हो गए और आरोपियों के निर्देशों का पालन करने लगे। 60 घंटे तक वीडियो कॉल पर रखा, किसी से बात नहीं करने दी शिकायत में बताया गया है कि साइबर ठग लगातार फोन और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए दंपती के संपर्क में रहे। उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से बात नहीं करने दी गई। ठगी के अंतिम चरण में एक वीडियो कॉल करीब 60 घंटे तक जुड़ी रही। आरोपियों ने जांच का हवाला देते हुए दंपती को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के खाते में रकम
जमा कराने के लिए कहा। डर के कारण दंपती ने किसी को इसकी जानकारी नहीं दी और आरोपियों के निर्देश पर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करते रहे। पांच बार में ट्रांसफर किए 45.85 लाख रुपये पीड़ितों के मुताबिक, 21 से 27 अगस्त के बीच पांच अलग-अलग लेनदेन में कुल 45.85 लाख रुपये जमा किए गए। इनमें चार बार RTGS के माध्यम से रकम ट्रांसफर की गई, जबकि एक बार बैंक शाखा में नकद जमा कराया गया। शिकायत में जिन खातों में रकम जमा कराने का उल्लेख है, उनमें सनातन ट्रेडर्स के नाम पर 15 लाख रुपये, प्रागज्योतिष एंटरप्राइजेज के खाते में 11.35 लाख रुपये, इंटीमेटेक्स प्राइवेट लिमिटेड के खाते में 11.50 लाख रुपये, शांबा मुराम के नाम पर पांच लाख रुपये और आदित्य संदीप महाराज के नाम से जुड़े खाते में तीन लाख रुपये शामिल हैं। आरोप है कि रकम मिलने के बाद भी ठगों ने दंपती पर दबाव बनाना जारी रखा और उन्हें