हल्द्वानी। कहते हैं कि प्यार की कोई सरहद नहीं होती। भाषा और संस्कृति की दूरियां भी सच्चे रिश्ते के आगे छोटी पड़ जाती हैं। उत्तराखंड के हल्द्वानी में दशहरे के अवसर पर ऐसी ही एक प्रेम कहानी शादी के बंधन में बंध गई। थाईलैंड की रहने वाली मोराया ने बागेश्वर जिले के उडल गांव निवासी नवीन परिहार के साथ कुमाऊंनी रीति-रिवाज से सात फेरे लेकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। दोनों की मुलाकात दुबई में हुई थी, जहां दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

दुबई में हुई मुलाकात, दोस्ती से शुरू हुई प्रेम कहानी
नवीन परिहार के परिजनों के मुताबिक, नवीन ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई बागेश्वर में पूरी की। इसके बाद उन्होंने हल्द्वानी से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया और रोजगार की तलाश में दुबई चले गए। करीब तीन साल पहले दुबई में ही उनकी मुलाकात थाईलैंड की रहने वाली मोराया से हुई।
शुरुआत में दोनों के बीच दोस्ती हुई। समय के साथ यह रिश्ता गहरा होता गया और दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का फैसला किया। इसके बाद उनकी प्रेम कहानी का खूबसूरत पड़ाव हल्द्वानी में देखने को मिला, जहां दोनों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शादी कर ली।
हल्द्वानी में कुमाऊंनी परंपरा के अनुसार संपन्न हुआ विवाह
नवीन का पैतृक गांव उडल दूरस्थ क्षेत्र में होने और परिवार के सदस्यों के साथ विदेशी मेहमानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विवाह के लिए उनकी बहन के देवलचौड़ स्थित घर को चुना गया।
19 अक्टूबर को घर पर पारिवारिक रस्में निभाई गईं, जबकि 20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर कुमाऊंनी पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न कराया। इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मोराया और नवीन ने एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।
अंग्रेजी ट्रांसलेटर की मदद से समझीं शादी की रस्में
मोराया के लिए कुमाऊंनी विवाह की परंपराएं नई थीं। भाषा अलग होने के बावजूद उन्होंने भारतीय संस्कृति और विवाह की रस्मों को समझने में गहरी रुचि दिखाई। अंग्रेजी ट्रांसलेटर की मदद से उन्हें विभिन्न रस्मों का अर्थ समझाया गया। इसके बाद उन्होंने पूरे उत्साह के साथ सभी परंपराओं में हिस्सा लिया।
इस विवाह का एक खास पहलू यह भी रहा कि थाईलैंड से पहुंचे मोराया के भाई और भाभी ने कुमाऊंनी परंपरा के अनुसार कन्यादान की रस्म निभाई। इस दौरान दोनों परिवारों ने मिलकर विवाह को यादगार बनाया।
दो संस्कृतियों का मिलन बना शादी की खास पहचान
हल्द्वानी में संपन्न यह विवाह केवल दो लोगों के रिश्ते का नया अध्याय नहीं, बल्कि दो अलग-अलग देशों की संस्कृतियों के मिलन की खूबसूरत मिसाल भी बना। थाईलैंड की मोराया ने उत्तराखंड की कुमाऊंनी परंपराओं को अपनाया, वहीं दोनों परिवारों ने आपसी प्रेम और अपनत्व के साथ इस रिश्ते का स्वागत किया।





