नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के विवाद के बाद मेटा (Meta) पर दबाव बढ़ गया है। इस बीच कंपनी के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने प्लेटफॉर्म संचालन से जुड़ी चूक, बच्चों के यौन शोषण से संबंधित कंटेंट (CSAM) और डीपफेक सामग्री को लेकर माफी जताई है। वहीं, संसदीय समिति ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पहले मेटा से जवाब और माफी की मांग की थी।

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मेटा अधिकारियों की मुलाकात
बुधवार को मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने अपनी टीम के साथ केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। यह बैठक करीब आधे घंटे तक चली। इससे पहले मेटा के प्रतिनिधियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन से भी चर्चा की।
संसदीय समिति ने जताई थी कड़ी आपत्ति
सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह वीडियो कुछ समय के लिए फेसबुक से हटाए जाने के मामले पर कड़ी नाराजगी जताई थी। समिति ने मेटा से इस मामले में जवाब मांगा और तीन दिनों के भीतर बिना शर्त माफी देने को कहा था।
समिति ने यह भी कहा था कि यदि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं दिया गया तो आईटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत कंपनी के खिलाफ कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
Joel Kaplan, Chief Global Affairs Officer at Meta, along with his team, met Ashwini Vaishnaw, Minister of Electronics and IT today. Meeting with minister lasted around half an hour. Earlier today Meta officials also met with MeitY Secretary S. Krishnan. https://t.co/kfIcMNdclk
— ANI (@ANI) August 5, 2026
‘सेफ हार्बर’ प्रावधान पर भी उठे सवाल
बैठक के दौरान यह भी कहा गया कि यदि कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म अपने दायित्वों का पालन नहीं करता है, तो उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा का लाभ नहीं मिल सकता। समिति ने इस संदर्भ में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
CSAM और डीपफेक कंटेंट पर भी सख्त रुख
संसदीय समिति ने बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री (CSAM), महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट और डीपफेक जैसे मामलों पर भी चिंता जताई। समिति ने कहा कि यदि कोई इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म इस तरह की सामग्री को समय पर हटाने में विफल रहता है, तो उसके खिलाफ आईटी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेटा और केंद्र सरकार के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और आईटी नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।





