नैनीताल/किच्छा। किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका परिषद के चुनाव को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दोनों नगर पालिकाओं में 22 सितंबर को संपन्न हुए मतदान के बाद मतगणना स्थगित करने संबंधी राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि जब चुनाव प्रक्रिया के तहत मतदान हो चुका है तो मतगणना रोकने का औचित्य स्पष्ट होना चाहिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों नगर पालिकाओं में मतगणना का रास्ता साफ हो गया है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में हुई। किच्छा निवासी अलीना मलिक की ओर से दायर याचिका में चुनाव संपन्न होने के बाद मतगणना कराए जाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मतगणना स्थगित किए जाने को लेकर सवाल उठाया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग अब मतगणना को लेकर आगे की प्रक्रिया निर्धारित करेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मतगणना की तारीख और समय के संबंध में आयोग की ओर से नई अधिसूचना जारी किया जाना बाकी है।
क्या था पूरा मामला?
किच्छा नगर पालिका से सिरौलीकलां क्षेत्र को अलग कर नई नगर पालिका गठित किए जाने को लेकर पहले से ही न्यायालय में कानूनी विवाद चल रहा था। इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने दोनों नगर पालिकाओं में चुनाव कार्यक्रम जारी किया और 22 सितंबर को मतदान कराया गया। हालांकि मतदान से पहले ही मतगणना को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी और बाद में आयोग ने मतगणना स्थगित करने संबंधी संशोधित अधिसूचना जारी की थी।

मतदान के बाद मतगणना रोकने के फैसले को चुनौती देते हुए अलीना मलिक ने हाईकोर्ट का रुख किया। उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद खंडपीठ ने मतगणना स्थगित करने संबंधी आदेश पर रोक लगा दी।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव में डाले गए मतों की गिनती का रास्ता साफ हो गया है। अब सभी प्रत्याशियों और समर्थकों की निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग की अगली अधिसूचना पर टिकी हैं। आयोग की ओर से मतगणना की तारीख और समय निर्धारित किए जाने के बाद चुनाव परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
दोनों नगर पालिकाओं में चुनाव परिणामों को लेकर प्रत्याशियों और समर्थकों में भी उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि, मतगणना कब होगी, इसकी आधिकारिक तारीख आयोग की नई अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगी।





