हल्द्वानी: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली रोकने के लिए केंद्र सरकार सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसी बीच उत्तराखंड के चर्चित यूट्यूबर सौरभ जोशी एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं। इस बार वजह उनका कोई नया व्लॉग नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंस्टाग्राम पोस्ट पर किया गया एक मजाकिया कमेंट है, जिसने इंटरनेट पर तेजी से सुर्खियां बटोर ली हैं।

PM मोदी की पोस्ट पर सौरभ जोशी का कमेंट हुआ वायरल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में परीक्षा व्यवस्था, छात्र हितों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया। इसी पोस्ट के कमेंट सेक्शन में हल्द्वानी निवासी यूट्यूबर सौरभ जोशी ने लिखा, “अब से डेली व्लॉग भी आएंगे क्या मोदी जी?”
यह कमेंट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इसके स्क्रीनशॉट साझा किए जाने लगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कमेंट को 55 हजार से अधिक लाइक्स मिले, जबकि हजारों यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में किया गया मजाक बताया, वहीं कई यूजर्स ने इस पर अलग-अलग राय भी व्यक्त की।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं सौरभ जोशी
यह पहला मौका नहीं है जब सौरभ जोशी किसी विवाद या चर्चा का हिस्सा बने हों। इससे पहले उन्होंने E20 पेट्रोल को लेकर एक वीडियो में अपनी लग्जरी कार के माइलेज पर सवाल उठाए थे। वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा। बाद में वाहन निर्माता कंपनी की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सौरभ जोशी ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी।
पेपर लीक पर सख्त कानून लाने की तैयारी
दूसरी ओर, केंद्र सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित विधेयक में संगठित तरीके से पेपर लीक कराने और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।
प्रस्तावित विधेयक की प्रमुख बातें
- संगठित पेपर लीक मामलों में कम से कम 7 वर्ष की सजा का प्रावधान।
- दोषियों पर ₹10 करोड़ तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- जांच प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव।
- आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का प्रावधान।
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने पर सरकार का जोर
सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था आवश्यक है। इसी उद्देश्य से परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने की भी घोषणा की गई है। प्रस्तावित कानून का मकसद पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना और दोषियों को कड़ी सजा दिलाना है।
हालांकि, सौरभ जोशी का वायरल कमेंट और केंद्र सरकार की परीक्षा सुधार संबंधी पहल दो अलग-अलग घटनाएं हैं, लेकिन दोनों विषय एक ही समय चर्चा में आने के कारण सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से ट्रेंड कर रहे हैं।





