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उत्तराखंड में बड़ा एक्शन! भ्रष्टाचार के आरोपों में जिला पर्यटन विकास अधिकारी सस्पेंड

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उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में पर्यटन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) ने देहरादून के जिला पर्यटन विकास अधिकारी (डीटीडीओ) बृजेन्द्र पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करते हुए पूरे मामले की जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

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पर्यटन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और शिकायतों में दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना के तहत अनुदान राशि जारी करने के बदले कथित तौर पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए थे। इन शिकायतों का संज्ञान लेने के बाद परिषद ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई की।

यह मामला राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना से जुड़ा है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को होम-स्टे विकसित करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। आरोप है कि इसी अनुदान राशि को जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी।

परिषद ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेन्द्र सिंह भण्डारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच के दौरान वायरल वीडियो, शिकायतों, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय होगी।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो विभाग नियमानुसार आगे का निर्णय करेगा।

निलंबन आदेश के अनुसार, बृजेन्द्र पाण्डेय निलंबन अवधि के दौरान उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के मुख्यालय, देहरादून से संबद्ध रहेंगे। उन्हें बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और विभागीय निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।

आदेश में यह भी कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें वित्तीय नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) दिया जाएगा। हालांकि, यह भुगतान तभी होगा जब संबंधित अधिकारी यह प्रमाणित करेंगे कि वे इस दौरान किसी अन्य सेवा, व्यवसाय या रोजगार से जुड़े नहीं हैं।

पर्यटन विभाग की यह कार्रवाई राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है। सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई कर विभाग ने यह संदेश दिया है कि जनहित से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फिलहाल विभागीय जांच शुरू हो चुकी है और अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और संबंधित अधिकारी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

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