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थे। इन शिकायतों का संज्ञान लेने के बाद परिषद ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई की। यह मामला राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना से जुड़ा है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को होम-स्टे विकसित करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। आरोप है कि इसी अनुदान राशि को जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी। परिषद ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेन्द्र सिंह भण्डारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच के दौरान वायरल वीडियो,
शिकायतों, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो विभाग नियमानुसार आगे का निर्णय करेगा। निलंबन आदेश के अनुसार, बृजेन्द्र पाण्डेय निलंबन अवधि के दौरान उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के मुख्यालय, देहरादून से संबद्ध रहेंगे। उन्हें बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और विभागीय निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें वित्तीय नियमों के