Tuesday, February 10, 2026
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नदिया व खेतों का सीना चीरती पोकलैंड मशीन, केलाखेड़ा में धड़ल्ले से चल रहा अवैध खनन का खेल, ऊधमसिंह नगर का पुलिस एवं प्रशासन मौन।

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उधम सिंह नगर जिले में खुलेआम बेख़ौफ़ होकर अवैध खनन करने वाले माफिया अनुमति पक्की जमीन की लेकर वर्ग क की जमीन 1 किलोमीटर खेतो से खनन निकालकर चांदी काट रहे है। अनुमति कही की निकासी कही की” जेसीबी और पोकलैंड मशीन से नदियों का सीना चीर रहे हैं। प्रशासन को शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना कहीं ना कहीं इन माफियाओ का हौसला बढ़ता है।

राजीव चावला/ एडिटर।

उधम सिंह नगर जिले के केलाखेड़ा क्षेत्र में इन दिनों अवैध खनन का गोरखधंधा खुलेआम चल रहा है। जहां खनन माफिया अनुमति किसी और खेत की लेते है और अनुमति वाले इलाके से करीब 1 किलोमीटर दूर जाकर मशीनों से अवैध खनन कर रहे है।खनन माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि दिनदहाड़े नदी और उसके किनारे बसे खेतों में जेसीबी और पोकलैंड मशीनों के ज़रिए गहराई तक खुदाई कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इसकी शिकायत दी, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही अवैध खनन पर कोई अंकुश लग पाया है। स्थिति यह हो गई है कि प्रशासनिक आदेश और पर्यावरणीय नियमों को ताक पर रखकर खनन माफिया जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से 40 से 50 फीट गहरे गड्ढे कर चुके हैं। इससे एक ओर जहां सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर इलाके की भौगोलिक स्थिति को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। नदी का प्राकृतिक प्रवाह मोड़ा जा रहा है, जिससे वर्षा ऋतु में बाढ़ की आशंका को बल मिल रहा है। स्थानीय निवासियों को डर है कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो आने वाली बरसात में नदी का रुख बस्तियों की ओर हो सकता है, जिससे जन-धन की व्यापक हानि हो सकती है।
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विधायक पांडेय ने दिखाएं उग्र तेवर
बीते सप्ताह क्षेत्रीय विधायक अरविंद पांडे ने अपने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचकर अवैध खनन का निरीक्षण किया था। उन्होंने नदी के किनारे बने गहरे गड्ढों को देखकर हैरानी जताई और उच्च अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए। लेकिन इसके बाद भी खनन माफिया के हौसले और बुलंद हो गए हैं। उनका कहना था कि नदी क्षेत्र में हो रहा यह खनन पूरी तरह अवैध है और इससे भविष्य में बड़ी प्राकृतिक आपदा भी आ सकती है।
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प्रशासन के रवैया पर लोगों का आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार उपजिलाधिकारी, तहसील प्रशासन और पुलिस से लिखित शिकायत भी दी, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। यह उदासीनता न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि खनन माफियाओं को संरक्षण देने की आशंका को भी जन्म देती है।
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दहशत,पर्यावरण पर छाया संकट
खनन से निकली मिट्टी और रेत ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर आसपास के इलाकों में निर्माण कार्यों के लिए भेजी जा रही है। इससे ग्रामीण रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक्टरों के तेज रफ्तार और वजन के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। साथ ही, नदी की प्राकृतिक संरचना बिगड़ने से भू-क्षरण और जलस्तर में बदलाव की संभावना भी जताई और ग्रामीण सड़क हादसों एवं माफियाओं की गुंडई से भी खौफजदा है।
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क्या कहता है प्रशासन?
इस विषय पर जब प्रशासनिक अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो कुछ अधिकारियों ने जांच का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया, जबकि कुछ ने स्पष्ट रूप से कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। इससे साफ है कि या तो प्रशासन की जानकारी में सब कुछ होते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं, या फिर खनन माफियाओं को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
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निष्कर्ष:
केलाखेड़ा में चल रहा यह अवैध खनन केवल सरकारी नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि जन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक गंभीर चुनौती है। यदि प्रशासन जल्द कोई कड़ा कदम नहीं उठाता है, तो आने वाले समय में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है

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