Monday, January 26, 2026
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ज़िला पंचायत अध्यक्ष चुनाव- क्या मजबूत स्थिति में है गंगवार परिवार?

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उधम सिंह नगर जिले में 2025 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला रोमांचक होने की उम्मीद है। इस बार रेनू गंगवार, जो पिछले 23 वर्षों से गंगवार परिवार के साथ इस पद पर प्रभाव बनाए हुए हैं, फिर से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने अजय मौर्या को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। हालांकि, रेनू गंगवार की स्थानीय पकड़, अनुभव और राजनीतिक प्रभाव उन्हें इस चुनाव में एक मजबूत प्रत्याशी बनाते हैं।

रेनू गंगवार की मजबूत स्थिति

रेनू गंगवार का नाम उधम सिंह नगर की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम है। 2019 के पंचायत चुनाव में उन्होंने बरा क्षेत्र से 9585 वोटों के विशाल अंतर से जीत हासिल की थी, जो उनकी लोकप्रियता और स्थानीय समर्थन का प्रतीक है। गंगवार परिवार का सितारगंज क्षेत्र में मजबूत आधार है, और पिछले दो दशकों से वे जिला पंचायत की राजनीति में प्रभावशाली रहे हैं।

2025 के चुनाव में रेनू गंगवार संभावित रूप से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर सकती हैं, क्योंकि उन्होंने और उनके पति सुरेश गंगवार ने 2024 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। उनकी यह रणनीति उनके स्थानीय प्रभाव को और मजबूत करती है, क्योंकि वे अब किसी एक दल की बाध्यता से मुक्त होकर व्यापक समर्थन जुटा सकती हैं।

रेनू गंगवार की ताकत

  1. स्थानीय प्रभाव और अनुभव:

    • रेनू गंगवार का 23 साल का अनुभव और गंगवार परिवार का सितारगंज में मजबूत सामाजिक-राजनीतिक नेटवर्क उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है।

    • 2019 में उनकी निर्विरोध जीत इस बात का प्रमाण है कि विपक्षी दल भी उनके सामने मजबूत उम्मीदवार उतारने से हिचकते हैं।

    • उनकी जीत में स्थानीय समुदायों, खासकर सितारगंज और आसपास के क्षेत्रों का समर्थन महत्वपूर्ण रहा है।

  2. निर्दलीयों का समर्थन:

    • 2025 के चुनाव में 35 जिला पंचायत सीटों में से 11 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती हैं। रेनू गंगवार की स्थानीय लोकप्रियता और उनके परिवार की राजनीतिक पकड़ को देखते हुए, इनमें से कई निर्दलीय सदस्य उनके पक्ष में मतदान कर सकते हैं।

    • गंगवार परिवार का प्रभाव भंगा सीट पर भी देखा गया, जहां उनके परिवार से संबंधित उम्मीदवार ने पांचवीं बार जीत दर्ज की।

  3. कांग्रेस के कुछ सदस्यों का समर्थन:

    • कांग्रेस के 12 निर्वाचित सदस्यों में से कुछ के रेनू गंगवार के साथ पुराने संबंध हैं, क्योंकि वे पहले कांग्रेस के साथ जुड़े थे। यह समर्थन उनके लिए निर्णायक हो सकता है।

    • कुछ कांग्रेसी सदस्यों के भाजपा के संपर्क में होने की चर्चा है, लेकिन रेनू की स्थानीय पकड़ कुछ सदस्यों को उनके पक्ष में ला सकती है।

  4. जमीनी स्तर पर लोकप्रियता:

    • रेनू गंगवार की 9585 वोटों की जीत (2019) उनकी जमीनी स्तर की लोकप्रियता को दर्शाती है। यह अंतर जिले में सबसे बड़ा था, जो उनकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

    • उनकी सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों ने उन्हें स्थानीय मतदाताओं और प्रभावशाली समुदायों के बीच एक मजबूत छवि दी है।

अजय मौर्या और भाजपा की चुनौती

अजय मौर्या, जिन्हें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का समर्थन प्राप्त है, भाजपा के 12 निर्वाचित सदस्यों के वोटों पर भरोसा कर सकते हैं। उनकी उम्मीदवारी को संगठनात्मक ताकत और कुछ निर्दलीय/कांग्रेस सदस्यों के संभावित समर्थन से बल मिल सकता है। हालांकि, मौर्या का स्थानीय स्तर पर गंगवार परिवार जितना प्रभाव नहीं है।

  • भाजपा की रणनीति: भाजपा ने इस बार गंगवार परिवार को दरकिनार कर नया चेहरा लाने की कोशिश की है, जो उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। रेनू गंगवार की जमीनी पकड़ और अनुभव के सामने मौर्या को कड़ी चुनौती मिल सकती है।

  • निर्दलीयों पर निर्भरता: मौर्या को जीत के लिए कम से कम 18 वोट चाहिए, जिसमें 12 भाजपा के वोट हैं। बाकी 6 वोटों के लिए उन्हें निर्दलीय और कांग्रेस सदस्यों पर निर्भर रहना होगा, जो रेनू गंगवार के प्रभाव के कारण मुश्किल हो सकता है।

उधम सिंह नगर जिले के 2025 के चुनाव का गणित

  • कुल जिला पंचायत सीटें: 35

  • परिणाम:

    • भाजपा: 12 सीटें

    • कांग्रेस: 12 सीटें

    • निर्दलीय: 11 सीटें

रेनू गंगवार की मजबूत स्थिति के आधार 

रेनू गंगवार की दावेदारी को मजबूत बनाने वाले प्रमुख कारक हैं:

  • निर्दलीयों की भूमिका: 11 निर्दलीय सदस्यों में से कई उनके पक्ष में जा सकते हैं, क्योंकि गंगवार परिवार का प्रभाव और उनकी सामाजिक सक्रियता उन्हें स्थानीय नेताओं के बीच लोकप्रिय बनाती है।

  • कांग्रेस का विभाजन: कांग्रेस के 12 सदस्यों में से कुछ का समर्थन रेनू को मिल सकता है, क्योंकि उनकी पुरानी राजनीतिक साझेदारी और स्थानीय प्रभाव अभी भी कायम है।

  • स्थानीय समीकरण: सितारगंज और भंगा जैसे क्षेत्रों में गंगवार परिवार का दबदबा रेनू को एक मजबूत आधार देता है। उनकी पिछली जीत (9585 वोटों का अंतर) उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है।

  • निर्विरोध जीत का इतिहास: 2019 में उनकी निर्विरोध जीत इस बात का संकेत है कि विपक्ष उनके सामने मजबूत चुनौती पेश करने में असमर्थ रहा है।

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