केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के एक दिन बाद रविवार को वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति द्वारा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
प्रह्लाद जोशी पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उनके पास शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी होगी।
NEET विवाद के बीच हुआ नेतृत्व परिवर्तन
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब देशभर में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में छात्र NEET पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी लगातार शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की मांग कर रहे थे। इस बीच शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देकर नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की।
इस्तीफे में क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह मामला उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिनों में हुई घटनाओं से वह बेहद आहत और व्यथित हैं। इसी कारण उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया।
कार्यभार संभालते ही अधिकारियों के साथ बैठक
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न योजनाओं और मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा की। माना जा रहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता NEET पेपर लीक मामले से जुड़े मुद्दों का समाधान, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना होगी।
New Delhi: Union Minister Pralhad Joshi takes additional charge of the Ministry of Education.
(Source: Ministry of Education) pic.twitter.com/NrYUvSGaFM
— ANI (@ANI) July 26, 2026
अनुभवी मंत्री हैं प्रह्लाद जोशी
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के सबसे अनुभवी मंत्रियों में गिने जाते हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उनकी पहचान एक कुशल संसदीय रणनीतिकार और प्रभावी प्रशासक के रूप में रही है।
कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके जोशी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। लंबे संसदीय अनुभव और प्रशासनिक क्षमता के चलते उन्हें सरकार में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रही हैं।
नई शिक्षा मंत्री के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां
शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालने के साथ ही प्रह्लाद जोशी के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बहाल करना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देना, विद्यालयी और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना प्रमुख माना जा रहा है।
सरकार की नजर अब इस बात पर होगी कि शिक्षा मंत्रालय छात्रों के बीच भरोसा बहाल करने और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाता है।





