नई दिल्ली: अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन अब तक दोनों देश ईरान को झुकाने में कामयाब नहीं हो पाए हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बड़े दावों के बावजूद खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और ईरान की होर्मुज स्ट्रेट रणनीति ने अमेरिका पर वैश्विक दबाव बढ़ा दिया है।
इसी पृष्ठभूमि में ईरान ने अमेरिका की हालिया विदेश नीति पर कड़ा हमला बोला है। ईरानी विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए वॉशिंगटन पर तंज कसते हुए कहा कि हालात ऐसे बन गए हैं कि अमेरिका को भारत और अन्य देशों से मदद की गुहार लगानी पड़ रही है।
ट्रंप के बदले तेवर पर ईरान का निशाना
दरअसल, भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान जब नई दिल्ली ने ट्रंप के मध्यस्थता के दावे को खारिज कर दिया था, तब अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर टैरिफ को लेकर सख्त रुख अपनाया था। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका ने भारत के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाए थे और आयात पर भारी टैरिफ लगाया था।
The U.S. spent months on bullying India into ending oil imports from Russia. After two weeks of war with Iran, White House is now begging the world—incl India—to buy Russian crude.
Europe thought backing illegal war on Iran would win U.S. support against Russia.
Pathetic. pic.twitter.com/fbkrXpXa9P
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) March 13, 2026
हालांकि ईरान युद्ध के बीच अब ट्रंप प्रशासन का रुख कुछ नरम पड़ता दिखाई दे रहा है, जिसे लेकर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
रूस को मिल रहा युद्ध का फायदा
ईरानी विदेश मंत्री ने Financial Times की एक रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिकी नीति में बदलाव का फायदा रूस को मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक रूसी तेल की बिक्री से Vladimir Putin के नेतृत्व वाले रूस को रोजाना करीब 15 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त लाभ हो रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि:
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ईरान संघर्ष के कारण रूस की ऊर्जा आय में तेजी आई है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण भारत और चीन को रूसी तेल की बिक्री बढ़ी है।
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खाड़ी देशों को युद्ध से होने वाले नुकसान का अप्रत्यक्ष फायदा रूस को मिल रहा है।
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तेल टैंकरों पर हमलों की वजह से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
भारत को रूस से तेल खरीदने पर मिली छूट
ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने भारत समेत कुछ देशों को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दे दी है। इससे पहले रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आ गई थी और अमेरिका ने भारत से आयात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था।
विश्लेषकों के अनुसार ईरान पर हमले के दौरान अमेरिका शायद होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की सामरिक ताकत का सही आकलन नहीं कर पाया। दुनिया के करीब 25 प्रतिशत कच्चे तेल, गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद इसी समुद्री मार्ग से गुजरते हैं।
युद्ध शुरू होने से पहले तक भारत अपने लगभग 45 प्रतिशत तेल और गैस का आयात इसी रास्ते से करता था। अब संघर्ष लंबा खिंचने से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो रही है और ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है, जिसके चलते अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ता जा रहा है।





