देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने प्रदेश में चल रहे नकली दवाओं के संगठित कारोबार का पर्दाफाश करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। टीम ने रुड़की और देवबंद में दबिश देकर ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाएं बनाने और बेचने वाले गिरोह के सदस्यों को पकड़ा। इस मामले में अब तक कुल 16 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
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1 जून को हुई थी पहली गिरफ्तारी
मामले की शुरुआत 1 जून 2025 को हुई, जब संतोष कुमार को प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नकली रैपर, आउटर बॉक्स, लेबल और क्यूआर कोड के साथ गिरफ्तार किया गया। इस संबंध में थाना सेलाकुई, देहरादून में मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसकी विवेचना बाद में एसटीएफ को सौंपी गई।
संगठित तरीके से बाजार में बेची जा रही थीं नकली दवाएं
जांच में सामने आया कि पहले गिरफ्तार आरोपी नवीन बसंल उर्फ अक्षय (निवासी भिवाड़ी, राजस्थान) ने नरेश धीमान, लोकेश गुलाटी और मोहतरम अली से ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं खरीदकर बाजार में सप्लाई कीं। एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए नरेश धीमान, लोकेश गुलाटी और मोहतरम अली को उनके ठिकानों से गिरफ्तार किया।
भारी मात्रा में दवाएं और कच्चा माल बरामद
कार्रवाई के दौरान 263 किलोग्राम पैरासिटामोल, 2490 किलोग्राम जिंक पाउडर, 5000 पैरासिटामोल टैबलेट और 16,200 ऑक्साल्जिन-डीपी टैबलेट बरामद की गईं। उत्तराखंड राजकीय लैब की जांच में दवाओं के सैंपल और पैकिंग सामग्री को नकली पाया गया है।
अन्य राज्यों में भी जांच जारी
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि नकली दवा कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है और गिरोह के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी लोकेश गुलाटी के खिलाफ नकली दवाओं से संबंधित एक अन्य मुकदमा थाना गंगनहर, हरिद्वार में भी दर्ज है।
एसटीएफ अन्य राज्यों से भी जानकारी एकत्र कर इस संगठित अपराध के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है।





