देहरादून। विकासनगर क्षेत्र के ग्राम अटक फार्म में टिहरी बांध परियोजना से विस्थापित परिवारों को आखिरकार उनका वैध अधिकार मिल गया। जिला प्रशासन की सख्त और प्रभावी कार्रवाई के तहत वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जे को हटाकर आवंटित भूमि पर विधिवत कब्जा दिलाया गया। यह भूमि THDC India Limited की टिहरी बांध परियोजना के तहत पुनर्वास के लिए खरीदी और आवंटित की गई थी।

शिकायतकर्ता सुमेर चंद समेत अन्य लाभार्थियों ने आवासीय भूखंड संख्या-29 पर अवैध कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन से की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर तत्काल जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि निम्न मध्यम वर्ग के विस्थापित पहाड़ी दंपति की जमीन पर अवैध निर्माण और खेती की जा रही थी, जिससे वे लंबे समय से परेशान थे।
संयुक्त टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण
डीएम के निर्देश पर उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम ने अटक फार्म पुनर्वास स्थल पर पहुंचकर भूखंड संख्या 15, 16, 17, 27, 28 और 29 का निरीक्षण किया। स्वीकृत नक्शों और राजस्व अभिलेखों से मिलान करते हुए खसरा संख्या 301, 302 और 303 का सत्यापन किया गया। जांच में स्पष्ट हुआ कि संबंधित भूमि टिहरी परियोजना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए विधिवत खरीदी गई थी।
अवैध कब्जे का खुलासा, तुरंत कार्रवाई
संयुक्त जांच में पाया गया कि स्वर्गीय कुंदन लाल जोशी के वारिसों द्वारा भूमि पर अवैध कब्जा कर गन्ने की खेती की जा रही थी। प्रशासन ने बिना विलंब कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण और खेती को हटवाया तथा भूखंड संख्या-29 सहित अन्य प्लॉट संबंधित लाभार्थियों को सौंप दिए।
कार्रवाई पूरी होने के बाद शिकायतकर्ता सुमेर चंद और अन्य परिवारों को विधिवत कब्जा दिलाया गया। वर्षों से लंबित समस्या का समाधान होने पर प्रभावित परिवारों ने राहत की सांस ली और जिला प्रशासन का आभार जताया।
डीएम सविन बंसल का स्पष्ट संदेश
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि पात्र लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि कब्जाने वालों और भू-माफियाओं के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
परिवार ने जताया आभार
कब्जा मिलने के बाद पीड़ित महिला ने अपने भाई के साथ जिलाधिकारी से मुलाकात कर धन्यवाद ज्ञापित किया। परिवार ने इसे अपने जीवन का सबसे संघर्षपूर्ण लेकिन राहत भरा क्षण बताया।
इस कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि अवैध कब्जे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और विस्थापित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन पूरी मजबूती से खड़ा है। यह मामला अन्य पीड़ितों के लिए भी एक मिसाल बनकर सामने आया है।





