देहरादून: उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ नेता, वर्तमान विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे इन दिनों भूमि अतिक्रमण से जुड़े एक विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। बाजपुर के विचपुरी गांव की 68 वर्षीय महिला ने अरविंद पांडे पर लीज से अधिक भूमि पर अवैध कब्जा करने और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी को शिकायत सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, प्रशासन की ओर से अरविंद पांडे के आवास पर अतिक्रमण हटाने का नोटिस चस्पा किए जाने के बाद यह मामला और गरमा गया है। अरविंद पांडे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। बताया जा रहा है कि नोटिस जारी होने से अरविंद पांडे खासे नाराज हैं, जबकि उनके समर्थकों में भी इस कार्रवाई को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है।
इसी बीच, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उत्तराखंड दौरे के दौरान भाजपा के चार बड़े नेताओं का अरविंद पांडे से मिलने का कार्यक्रम तय होने से सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, हरिद्वार विधायक मदन कौशिक और डीडीहाट विधायक बिशन सिंह चुफाल आज अरविंद पांडे से मुलाकात करने वाले हैं। यह मुलाकात सामान्य नहीं मानी जा रही, क्योंकि इसका समय और राजनीतिक पृष्ठभूमि दोनों ही अहम मानी जा रही हैं।

पिछले कुछ महीनों से उत्तराखंड की राजनीति में लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड, फिर एक कैबिनेट मंत्री के परिजन के विवादित बयान और उसके बाद उधम सिंह नगर में किसान की आत्महत्या ने सरकार और पार्टी की मुश्किलें बढ़ाईं। अब पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे के खिलाफ भूमि अतिक्रमण का मामला सामने आने से भाजपा एक बार फिर विपक्ष और जनता के निशाने पर है।
अरविंद पांडे पहले भी धामी सरकार के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड और किसान आत्महत्या मामले में उन्होंने खुलकर सीबीआई जांच की मांग की थी। अब जब उन्हीं पर जमीन कब्जाने के आरोप लगे और प्रशासन की कार्रवाई सामने आई, तो इसे सरकार और पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है, जब अरविंद पांडे को 15 दिन के भीतर कथित अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात या तो अरविंद पांडे को मनाने और पार्टी के भीतर सुलह कराने की कोशिश हो सकती है, या फिर इसे धामी सरकार पर दबाव की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
कुछ सियासी विश्लेषक इसे भाजपा के भीतर उभरते गुटबाजी के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। माना जा रहा है कि त्रिवेंद्र रावत, अनिल बलूनी समेत कुछ वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से असंतुष्ट नेताओं को एकजुट करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में कुमाऊं क्षेत्र के नाराज विधायकों को साथ जोड़ने की कोशिश के तौर पर भी इस मुलाकात को देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि प्रशासन ने अरविंद पांडे को भूमि पर अतिक्रमण के आरोप में नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब अरविंद पांडे हाल ही में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर मुखर थे। इसी वजह से इस पूरे घटनाक्रम के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
कौन हैं अरविंद पांडे:
अरविंद पांडे गदरपुर विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं और त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उनका जन्म 20 मई 1971 को हुआ। वे भाजपा के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वर्ष 1997 में वे तत्कालीन उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के नगर पालिका अध्यक्ष बने थे।
अरविंद पांडे 2002 में पहली बार विधायक बने और तब से लगातार पांच बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने बाजपुर और गदरपुर दोनों विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया है। त्रिवेंद्र रावत सरकार में उनके पास शिक्षा, खेल, युवा कल्याण और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे। वर्ष 2022 में वे पांचवीं बार विधायक बने, हालांकि इस बार उन्हें मंत्री पद नहीं मिला।





