Tuesday, January 27, 2026
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उत्तराखंड में चमत्कार: रिकॉर्ड में दर्ज महिला की उम्र 364 साल, देवभूमि परिवार रजिस्टर योजना कर रही डेटा की जांच

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देहरादून: उत्तराखंड में पंचायती राज और परिवार रजिस्टर से जुड़े आंकड़ों में चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आई हैं। सरकारी रिकॉर्ड में किसी महिला की उम्र 364 साल दर्ज है, तो वहीं एक व्यक्ति 248 साल की उम्र में भी जीवित दर्शाया गया है। ये मामले इक्का-दुक्का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में करीब 5,000 ऐसे लोग पाए गए हैं, जिनकी उम्र 100 साल से अधिक दिखाई गई है और सभी को जिंदा बताया गया है।

ये खुलासे राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई ‘देवभूमि परिवार रजिस्टर योजना’ के तहत विभिन्न विभागों के डेटा को फिल्टर और मिलान करने के दौरान सामने आए हैं। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया से वर्षों से चली आ रही फर्जी प्रविष्टियों और आंकड़ों की गड़बड़ियों को दूर किया जाएगा।

डेमोग्राफी चेंज को लेकर सरकार की चिंता

उत्तराखंड में डेमोग्राफिक बदलाव को लेकर सरकार पहले से ही सतर्क रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई बार जनसंख्या से जुड़े असामान्य आंकड़ों और सरकारी योजनाओं में फर्जी लाभार्थियों पर चिंता जताई है। इन्हीं कारणों से सरकार ने एक समन्वित और केंद्रीकृत देवभूमि परिवार रजिस्टर योजना शुरू की, जिसके तहत सभी विभागों में दर्ज परिवारों के डेटा को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है।

परिवार की परिभाषा स्पष्ट न होना बना बड़ी समस्या

प्रमुख सचिव (नियोजन) आर. मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या यह है कि अब तक “परिवार” की कोई एक स्पष्ट और समान परिभाषा तय नहीं थी। अलग-अलग योजनाओं में लाभ लेने के लिए लोग अपने हिसाब से परिवार का आकार घटा-बढ़ा कर दर्ज कराते रहे।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं में लोग परिवार को छोटा दिखाते हैं, जबकि राशन कार्ड जैसी योजनाओं में अधिक यूनिट पाने के लिए परिवार को बड़ा दर्शाया जाता है। समाज कल्याण, पेंशन, पंचायती राज और अन्य विभागों में अलग-अलग मानकों का फायदा उठाकर वर्षों तक गलत डेटा दर्ज कराया गया।

पंचायती राज विभाग में सबसे ज्यादा गड़बड़ी

डेटा विश्लेषण में सामने आया कि पंचायती राज विभाग के रिकॉर्ड में ही सबसे अधिक विसंगतियां हैं। लगभग 5,000 लोग ऐसे मिले हैं, जिनकी उम्र 100 से 200 साल के बीच दर्ज है और वे जीवित बताए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है।

एक ग्राम पंचायत अधिकारी ने बताया कि कई बार शादी के बाद गांव छोड़ चुकी महिलाओं का नाम जानबूझकर परिवार रजिस्टर से नहीं हटाया जाता, ताकि योजनाओं का लाभ मिलता रहे।

जिलावार चौंकाने वाले आंकड़े

– पौड़ी गढ़वाल: 2078 लोग
– टिहरी गढ़वाल: 1198 लोग
– उधम सिंह नगर: 580 लोग
– अल्मोड़ा: 193 लोग
– पिथौरागढ़: 99 लोग
– चमोली: 64 लोग
– बागेश्वर: 56 लोग
– नैनीताल: 55 लोग
– हरिद्वार: 40 लोग
– रुद्रप्रयाग: 41 लोग
– उत्तरकाशी: 41 लोग
– चंपावत और देहरादून: 27-27 लोग

364 साल की महिला और 248 साल का पुरुष

डेटा जांच में सामने आए कुछ हैरान करने वाले उदाहरणों में—
– चमोली जिले की गंगा देवी: उम्र 364 साल
– उधम सिंह नगर के अजीत नारायण: उम्र 248 साल
– टिहरी गढ़वाल की रूप देवी: उम्र 181 साल
– पौड़ी गढ़वाल की चंदा देवी: उम्र 164 साल

इन सभी को रिकॉर्ड में जीवित दर्शाया गया है, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है।

अवैध और फर्जी लाभार्थियों पर भी नजर

प्रमुख सचिव ने बताया कि इस योजना का दूसरा उद्देश्य अवैध और अनधिकृत लोगों की पहचान करना भी है। हाल ही में राशन कार्ड सत्यापन अभियान के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी कार्ड हटाए गए थे। इसी तर्ज पर अब सभी योजनाओं के लाभार्थियों का डेटा एक प्लेटफॉर्म पर मिलान किया जाएगा।

कैसे काम करेगी देवभूमि परिवार रजिस्टर योजना

इस योजना के तहत राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पंचायत और नगर निकायों के परिवार रजिस्टर सहित सभी विभागों का डेटा आपस में मैच किया जाएगा। सत्यापन के बाद प्रत्येक परिवार को एक यूनिक आईडी, कोड और पासवर्ड दिया जाएगा। परिवार खुद ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सदस्य जोड़ने या हटाने का अनुरोध कर सकेगा, जिसे संबंधित विभाग सत्यापित करेगा।

आधार से लिंक होगी फैमिली आईडी

सरकार की योजना है कि आगे चलकर देवभूमि परिवार आईडी को आधार कार्ड से जोड़ा जाए। इसे कानूनी मान्यता देने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में कानून लाने की तैयारी है। भविष्य में सभी सरकारी योजनाओं का लाभ इसी फैमिली आईडी के आधार पर दिया जाएगा।

सीएम धामी की सख्त चेतावनी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि डेमोग्राफी में असंतुलन उत्तराखंड के लिए खतरा है। सरकार किसी भी कीमत पर आने वाली पीढ़ियों को असुरक्षित उत्तराखंड नहीं देना चाहती और इस दिशा में कोई जोखिम नहीं उठाया जाएगा।

क्या है परिवार रजिस्टर

परिवार रजिस्टर एक आधिकारिक सरकारी दस्तावेज होता है, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों का विवरण दर्ज रहता है। यह ग्राम पंचायत या नगर निकाय द्वारा तैयार किया जाता है और सरकारी योजनाओं, विरासत, संपत्ति विवाद और पहचान से जुड़े मामलों में अहम भूमिका निभाता है।

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