हरियाणा: देशभर में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा दिया जाता है, लेकिन बेटे की चाह आज भी कई परिवारों में गहरी रही है। ऐसी ही एक कहानी हरियाणा के फतेहाबाद जिले के जींद के उचाना भूना के ढाणी भोजराज से सामने आई है, जहां संजय कुमार और उनकी पत्नी सुनीता ने 10 बेटियों के बाद 19 साल बाद अपने परिवार में बेटे का स्वागत किया।

सूत्रों के अनुसार, संजय कुमार पहले से 10 बेटियों के पिता हैं। बेटे की चाह के चलते उन्होंने 11वीं डिलीवरी तक इंतजार किया, और अंततः उनकी पत्नी ने बेटे को जन्म दिया। बेटे के जन्म के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल है, मिठाई बांटी जा रही है और केक काटे जा रहे हैं। बेटे का नाम परिवार ने “दिलखुश” रखा है।
संजय और सुनीता की शादी वर्ष 2007 में राजस्थान के भादरा में हुई थी। शादी के डेढ़ साल बाद उनकी पहली बेटी सरीना का जन्म हुआ। इसके बाद लगातार 10 बेटियों ने जन्म लिया। संजय ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटियों को भगवान का आशीर्वाद समझा और हमेशा से उनका यह मानना रहा कि बेटियों के लिए भी एक भाई होना चाहिए। 19 साल बाद उनकी यह मन्नत पूरी हुई।
उनकी बड़ी बेटी सरीना 12वीं कक्षा में पढ़ती हैं, जबकि दूसरी बेटी अमृता 11वीं में है। इसके बाद क्रमश: सुशीला (7वीं), किरण (6वीं), दिव्या (5वीं), मन्नत (3वीं), कृतिका (2वीं), अमनीश (1वीं), लक्ष्मी (9वीं) और वैशाली (10वीं) हैं।
संजय की मां माया देवी पोते के जन्म से बेहद खुश हैं और उन्होंने कहा कि भगवान ने उनकी वर्षों की मन्नत पूरी कर दी। संजय पहले लोक निर्माण विभाग में डेली वेज पर काम करते थे, लेकिन 2018 में उनका कार्य समाप्त हो गया। इसके बाद उन्होंने मनरेगा के तहत मजदूरी कर परिवार का पालन किया। पिछले साल से मनरेगा का काम बंद होने के बावजूद संजय अपनी बेटियों की अच्छी परवरिश कर रहे हैं।
ओजस अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि 4 जनवरी को 11वीं डिलीवरी हुई। माँ और बच्चे दोनों की स्थिति गंभीर थी, मां में खून की कमी थी। सबसे पहले माँ को खून चढ़ाया गया और फिर नॉर्मल डिलीवरी कराई गई। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा और माँ दोनों स्वस्थ हैं।
गांव की सरपंच ज्योति देवी ने दंपति को सम्मानित करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि संजय और सुनीता उन परिवारों के लिए प्रेरणा हैं, जिन्होंने बेटे की चाह रखते हुए भी बेटियों का पालन-पोषण पूरी लगन से किया।





