Tuesday, January 27, 2026
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चेक बाउंस मामलों में बड़ा बदलाव: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ईमेल और WhatsApp से समन भेजने की दी मंजूरी

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देहरादून/नैनीताल: नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामलों की सुनवाई को तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि अब राज्य में चेक बाउंस मामलों में समन पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ ईमेल और WhatsApp जैसे डिजिटल माध्यमों के जरिए भी जारी किए जा सकेंगे।

Top court pauses order directing Uttarakhand to shift High Court outside  Nainital - India Today

रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स, 2025 के तहत यह नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चेक बाउंस मामलों में अब समन केवल डाक या पुलिस के माध्यम से भेजना अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा।

सर्कुलर में कहा गया है कि शिकायत दर्ज करते समय शिकायतकर्ता को आरोपी का सही ईमेल आईडी और WhatsApp नंबर उपलब्ध कराना होगा। साथ ही, दी गई जानकारी की सत्यता प्रमाणित करने के लिए एक अनिवार्य हलफनामा भी दाखिल करना होगा।

समन जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक शिकायत के साथ निर्धारित फॉर्मेट में एक सिनॉप्सिस संलग्न करना अनिवार्य होगा, जिसे कोर्ट स्टाफ कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज करेगा। आरोपी को समन जारी करने से पहले BNNS की धारा 223 के तहत किसी अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में राहत की दिशा में एक और कदम उठाते हुए ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा भी शुरू की है। सॉफ़्टवेयर में एक नया ड्राफ्ट टेम्प्लेट जोड़ा गया है, जो ‘कॉज ऑफ एक्शन’ से जुड़े लिमिटेशन पीरियड की स्वतः गणना करेगा। समन में अब ऑनलाइन पेमेंट लिंक का स्पष्ट उल्लेख होगा, जिससे आरोपी सीधे भुगतान कर सकेगा।

आरोपी CNR नंबर या केस क्रेडेंशियल डालकर चेक की राशि ऑनलाइन जमा कर सकता है। यदि इस सुविधा के माध्यम से भुगतान किया जाता है, तो कोर्ट कंपाउंडिंग के आधार पर मामले को बंद कर सकता है।

यह सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के संजाबीज तुरी बनाम किशोर एस. बरकर मामले में दिए गए हालिया फैसले के अनुपालन में जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में चेक बाउंस मामलों की बढ़ती संख्या और न्यायपालिका पर पड़ रहे भारी बोझ पर चिंता जताई थी।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शिकायतकर्ता द्वारा गलत ईमेल या WhatsApp जानकारी दी जाती है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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