Wednesday, January 28, 2026
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Nimesulide 100 mg पर बैन, अब नहीं मिलेगी यह पेन किलर, सरकार ने लगाया बैन, जानें वजह

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) नाइमेसुलाइड के 100 mg से अधिक वाली ओरल दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26A के तहत लिया गया है। सरकार का कहना है कि इतनी उच्च मात्रा वाली दवा मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी हो सकती है और इसके सुरक्षित विकल्प बाजार में मौजूद हैं।

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बैन का कारण:
स्वास्थ्य मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, 100 mg से अधिक नाइमेसुलाइड इंसानों के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इस दवा की लिवर पर संभावित टॉक्सिसिटी और अन्य दुष्प्रभावों को लेकर विश्व स्तर पर जांच चल रही है। सरकार ने ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की सिफारिशों के बाद यह निर्णय लिया। आदेश के मुताबिक, यह प्रतिबंध पूरे देश में तुरंत लागू होगा।

हेल्थ मिनिस्ट्री के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि “100 mg से ज्यादा निमेसुलाइड वाले सभी ओरल फॉर्मूलेशन, जो तुरंत रिलीज़ होने वाले डोज़ के रूप में होते हैं, इंसानों के लिए खतरा हो सकते हैं और इसके सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं।” सरकार ने इसे जनहित में उठाया गया कदम बताया है, ताकि लोगों की सेहत को कोई खतरा न हो।

इतिहास:
नाइमेसुलाइड को लेकर लंबे समय से सुरक्षा चिंताएं रही हैं। 2011 में 12 साल से कम उम्र के बच्चों में इस दवा के उपयोग पर रोक लगाई गई थी। जनवरी 2025 में सरकार ने पशुओं के लिए नाइमेसुलाइड की सभी दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। भारत में नाइमेसुलाइड का बाजार लगभग 497 करोड़ रुपये का है और पिछले 12 महीनों में इसमें 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

केंद्र सरकार ने नाइमेसुलाइड दवा पर बैन को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है.

दुनिया भर में जांच:
नाइमेसुलाइड की लिवर पर संभावित टॉक्सिसिटी और अन्य दुष्प्रभावों के कारण विश्व स्तर पर इसकी सुरक्षा पर जांच चल रही है। यह कदम स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों को कड़ा करने और उच्च जोखिम वाली दवाओं को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में लिया गया है।

फार्मा कंपनियों पर असर:
नाइमेसुलाइड ब्रांड बनाने वाली कंपनियों को उत्पादन रोकना होगा और प्रभावित बैचों को बाजार से वापस बुलाना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी कंपनियों पर इसका वित्तीय असर सीमित रहेगा क्योंकि यह NSAID बिक्री का छोटा हिस्सा है, लेकिन छोटी कंपनियों के राजस्व पर दबाव पड़ सकता है। सरकार ने पहले भी सेक्शन 26A के तहत कई हाई-रिस्क दवाओं और फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन पर प्रतिबंध लगाया है।

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