उत्तराखंड के नागरिकों के लिए राज्य सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। अब आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निशुल्क इलाज की सुविधा केवल उन्हीं लाभार्थियों को मिलेगी, जिनके पास डिजिटल (ऑनलाइन) राशन कार्ड होगा। यदि अस्पताल में भर्ती के समय आयुष्मान कार्ड का राशन कार्ड से लिंक सत्यापित नहीं हो पाया, तो मरीज को मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं दी जाएगी।

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आयुष्मान योजना के तहत पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, राज्य में फर्जी राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड से जुड़ी शिकायतें सामने आने के बाद सरकार ने सख्ती बरतते हुए यह निर्णय लिया है कि अब केवल खाद्य विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल राशन कार्ड के आधार पर ही आयुष्मान योजना का लाभ दिया जाएगा।
इसी क्रम में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सभी सरकारी और निजी सूचीबद्ध अस्पतालों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि मरीज को भर्ती करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि उसका राशन कार्ड ऑनलाइन प्रदर्शित (डिजिटल) हो रहा है या नहीं। यदि राशन कार्ड पोर्टल पर उपलब्ध और लिंक पाया गया, तभी आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क उपचार दिया जाएगा। लिंक न होने की स्थिति में मरीज को योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा।
राज्य में करीब 57 लाख लोगों के पास आयुष्मान कार्ड हैं, जिनमें से हजारों लाभार्थियों के राशन कार्ड अभी तक डिजिटल नहीं हो पाए हैं। ऐसे लोगों के लिए यह आदेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
खाद्य आपूर्ति विभाग ने राशन कार्ड की ई-केवाईसी की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित की है। यदि तय समय तक राशन कार्ड को डिजिटल नहीं कराया गया, तो लाभार्थियों को न केवल राशन मिलने में परेशानी होगी, बल्कि वे आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज से भी वंचित रह सकते हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने राशन कार्ड की ई-केवाईसी और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया पूरी करा लें।





