प्रदेश में पंचायत घरों के निर्माण को गति देने के लिए राज्य सरकार बड़ी पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पंचायत विभाग ने पंचायत घरों के लिए दी जाने वाली राज्यांश धनराशि को दोगुना करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट में पेश किया जाएगा।

वर्तमान में राज्य सरकार पंचायत घरों के निर्माण के लिए 10 लाख रुपये की सहायता देती है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से 20 लाख रुपये उपलब्ध कराए जाते हैं। कम राज्यांश के चलते कई स्थानों पर पंचायत भवनों का निर्माण कार्य बाधित हो रहा है।
पंचायती राज विभाग के उप निदेशक मनोज कुमार तिवारी के अनुसार केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्यांश को भी 20 लाख रुपये किए जाने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है। इसका उद्देश्य पंचायत भवनों के निर्माण में आ रही वित्तीय अड़चनों को दूर करना है।
गौरतलब है कि राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी प्रदेश की 803 ग्राम पंचायतों में अब तक पंचायत घर नहीं बन पाए हैं। विभाग के अनुसार राज्य में कुल 1300 से अधिक पंचायत घरों का निर्माण किया जाना है। इनमें से कई पंचायतों में भवन पूरी तरह से अनुपलब्ध हैं, जबकि कुछ स्थानों पर पंचायत भवन जर्जर हालत में हैं।
इस संबंध में सभी जिला पंचायत राज अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है, ताकि पंचायत घरों के निर्माण की वास्तविक स्थिति का आकलन कर जल्द कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।





