हरिद्वार। कनखल थाना क्षेत्र में 11 वर्षीय नाबालिग बेटी से दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने के मामले में अदालत ने दोषी पिता को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

करीब तीन वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीएससी) चंद्रमणि राय की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।
2023 में दर्ज हुआ था मामला
शासकीय अधिवक्ता भूपेंद्र चौहान के अनुसार, 27 फरवरी 2023 को कनखल क्षेत्र में यह मामला सामने आया था। पीड़िता ने अपने पिता पर दुष्कर्म और घटना का खुलासा करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। बच्ची ने बयान में बताया कि जब वह आठ-नौ वर्ष की थी, तभी से आरोपी उसके साथ जबरदस्ती करता आ रहा था।
पीड़िता ने यह बात परिवार के अन्य सदस्यों को भी बताई, लेकिन उसकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। बाद में मामला थाने पहुंचा, जहां आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
मोबाइल रिकॉर्डिंग बनी अहम साक्ष्य
मामले की जांच के दौरान पीड़िता द्वारा की गई मोबाइल रिकॉर्डिंग अहम सबूत साबित हुई। पीड़िता ने बताया कि जब लोग उसकी बात पर विश्वास नहीं कर रहे थे, तब उसने अपने पिता के साथ हुई बातचीत रिकॉर्ड कर ली थी। इस रिकॉर्डिंग को आरोपी की आवाज के परीक्षण के लिए केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) भेजा गया, जहां जांच में आरोपी की आवाज की पुष्टि हुई।
पुलिस ने विवेचना पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने छह गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह प्रस्तुत किए गए।
मुआवजा देने के निर्देश
अदालत ने राज्य सरकार को पीड़िता को चार लाख रुपये का मुआवजा एक माह के भीतर देने का आदेश दिया है। निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जिलाधिकारी को भेजकर उचित प्रतिकर सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अदालत के इस फैसले को बाल संरक्षण और महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





