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जोर देकर कहा कि सैकड़ों विस्थापित रबड़ फैक्ट्री श्रमिक और उनके आश्रित पिछले, 25 साल से भयंकर बेरोजगारी,आर्थिक तंगी और भुखमरी से जूझ रहे हैं। अपने विधिक रूप से मान्य देयों का भुगतान पाने के लिए वर्षों से कोर्ट में लंबी लडाई लड़ते हुए 650 से अधिक श्रमिक असमय ही मौत को गले लगा चुके हैं। परेशान-असहाय श्रमिकों के सभी देय बकाया भुगतान फौरन करवाने के बजाय मंत्री बरेली में तीन बड़े उद्योग लाने का हवा-हवाई वायदा-दावा कर इन सबके घावों पर नमक छिड़कने का ही काम कर रहे हैं जो निंदनीय है। श्री मिश्रा और अन्य अनेक वक्ताओं ने भी कहा कि रबड़ फैक्ट्री श्रमिकों के सभी विधिसम्मत देयों का भुगतान जल्द सुनिश्चित कराने के लिए यूनियन की ओर से पिछले काफी समय से
लगातार बरेली प्रशासन से लेकर मुख्य मन्त्री योगी आदित्यनाथ, उनके मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह तक को कई ज्ञापन दिए जा चुके हैं लेकिन भुगतान फिर भी अटका हुआ है और दुर्भाग्यवश बीमारी, आर्थिक तंगी में घिरे रबड़ फैक्ट्री श्रमिक लगभग हर महीने देकर असमय मौत के मुंह मे जा रहे हैं। ऐसे में पूर्व में श्रम मंत्री रहे पशुधन दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह रबड़ फैक्ट्री के विस्थापित श्रमिकों का कल्याण कराने के बजाय उनके प्रति घनघोर उपेक्षापूर्ण रवैया ही अपनाए हुए हैं जिससे समस्त रबड़ फैक्ट्री श्रमिकों में भारी बेचैनी, असंतोष और रोष है।मीटिंग में श्रमिक नेताओं ने कहा कि बंद रबड़ फैक्ट्री की 1170 एकड़ निष्प्रयोज्य खाली जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त करवाने की कठोर और ठोस कार्रवाई पर ध्यान