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गई है, न कि भारत या उसकी सेना की।" जस्टिस सूर्यकांत ने पोस्ट को पढ़ते हुए सवाल किया, "यह कोई न्यूज रिपोर्ट है या सोशल मीडिया पोस्ट?" इस पर सिब्बल ने बताया कि यह ट्विटर पर दिया गया एक सार्वजनिक बयान है। कोर्ट ने कहा कि प्रोफेसर के बयान ‘डॉग व्हिसलिंग’ यानी परोक्ष रूप से उकसाने वाली भाषा के तहत देखे जा सकते हैं। इस पर सिब्बल ने जवाब दिया कि "मेरे मुवक्किल ऑक्सफोर्ड से पढ़े हुए स्कॉलर हैं। उनका उद्देश्य किसी को भड़काना नहीं बल्कि विचार रखना था।" कोर्ट के सवाल और पुलिस से जवाबतलबी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस से भी यह पूछा कि क्या अली खान ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ टिप्पणी की थी। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि देश संकट में
है तो ऐसे संवेदनशील समय में इस तरह की पोस्ट डालने की क्या आवश्यकता थी? कपिल सिब्बल का तर्क: “आपराधिक मंशा नहीं थी” कपिल सिब्बल ने कहा कि यह पोस्ट 10 तारीख के बाद भी डाली जा सकती थी, लेकिन इसका उद्देश्य आपराधिक नहीं था। फिर अचानक एफआईआर और तुरंत गिरफ्तारी क्यों की गई? सिब्बल के इस तर्क पर विचार करते हुए कोर्ट ने माना कि पोस्ट भले ही विवादास्पद रही हो, लेकिन इससे सीधे कोई आपराधिक मंशा साबित नहीं होती। इसी आधार पर प्रोफेसर अली खान को अंतरिम जमानत दे दी गई। 24 घंटे में SIT गठित करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट की पीठ – जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह ने हरियाणा के डीजीपी को निर्देश दिया कि इस मामले की जांच के लिए 24 घंटे के भीतर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन