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कि उन्हें लंबे समय तक विश्वास था कि विजय बहुगुणा कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे, लेकिन अंततः उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। अपनी पोस्ट में उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा का भी उल्लेख किया। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। सौरभ बहुगुणा का तीखा पलटवार हरीश रावत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि उनके बयानों को अब गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा का उत्तराखंड और देश की राजनीति में ऐतिहासिक योगदान
रहा है और उनके नाम को राजनीतिक विवादों में घसीटना उचित नहीं है। सौरभ बहुगुणा ने कहा कि यदि किसी नेता की राजनीतिक आलोचना करनी है तो वह सीधे संबंधित व्यक्ति पर की जानी चाहिए, लेकिन दिवंगत नेताओं की विरासत और सम्मान को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। 2016 का सियासी घटनाक्रम फिर चर्चा में इस विवाद के बीच वर्ष 2016 का राजनीतिक घटनाक्रम भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान विजय बहुगुणा समेत कई कांग्रेस विधायकों ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया