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अल्लाह का होता है, वापस लाना मुश्किल" मेहता ने कोर्ट से आग्रह किया कि फाइनल फैसला आने तक कोई अंतरिम आदेश न दिया जाए, क्योंकि यदि इस दौरान संपत्ति वक्फ बोर्ड को सौंप दी गई, तो उसे दोबारा वापस लाना मुश्किल हो जाएगा। "वक्फ अल्लाह का होता है, इसलिए उसे पुनः प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।" दान और वक्फ में फर्क: SG मेहता की व्याख्या SG ने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ बनाना और वक्फ को दान देना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। उन्होंने कहा कि कोई हिंदू व्यक्ति भी वक्फ को दान दे सकता है, लेकिन वक्फ बनाने के लिए यह जरूरी है कि दाता मुस्लिम हो और कम से कम पांच वर्षों से इस्लामिक प्रैक्टिस में हो। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि कोई दुरुपयोग न कर सके। "वक्फ बाय यूजर इस्लाम का हिस्सा नहीं": राजस्थान सरकार राजस्थान सरकार की ओर से पेश
वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने SG की दलीलों का समर्थन करते हुए कहा कि "वक्फ बाय यूजर" इस्लाम का हिस्सा नहीं है, और यह परंपरा भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर नहीं पाई जाती। उन्होंने अयोध्या फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इसमें भी तीन बार यह बात स्पष्ट की गई है। 2013 के कानून में बदलाव पर सवाल SG ने कोर्ट को बताया कि 1923 से 2013 तक वक्फ बनाने का अधिकार केवल मुस्लिमों को था, लेकिन 2013 में इसे बदलकर ‘कोई भी व्यक्ति’ कर दिया गया। अब, नए संशोधन में इसे हटाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई हिंदू व्यक्ति सार्वजनिक उद्देश्य के लिए मस्जिद बनाना चाहे, तो उसे वक्फ नहीं बनाना होगा, बल्कि वह पब्लिक ट्रस्ट बनाकर भी यह काम कर सकता है, जैसा बॉम्बे ट्रस्ट अधिनियम में प्रावधान है। जनजातीय इलाकों से भी आई हैं शिकायतें SG ने कोर्ट को बताया